उत्तर प्रदेशलखनऊ

यूपी बजट सत्र:  सदन में बोले ऊर्जा मंत्री- 6 साल से नहीं बढ़ीं बिजली की दरें, किसानों के बिल हुए माफ

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र में आज सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। बिजली की दरों और निजीकरण के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे विपक्ष पर पलटवार करते हुए ऊर्जा मंत्री ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था में आए सुधारों का ब्यौरा पेश किया।

बिजली की दरों पर ऊर्जा मंत्री का बड़ा दावा

ऊर्जा मंत्री ने सदन में कहा कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब लगातार छह वर्षों से बिजली की दरों में एक पैसे की भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि गरीब उपभोक्ताओं को बिल जमा करने पर 25 प्रतिशत की छूट दी गई और किसानों के बिजली बिल माफ कर उन्हें बड़ी राहत पहुंचाई गई।

सरकार के प्रयासों से अब प्रदेश में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत बढ़कर 724 यूनिट हो गई है। मंत्री ने कहा कि पहले सपा शासन में प्रदेश ‘बीमारू’ था, लेकिन अब हर नागरिक तक बिना रुकावट (निर्बाध) बिजली पहुंच रही है।

निजीकरण और कर्मचारियों पर रुख

बिजली विभाग के निजीकरण की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार जो भी फैसला लेगी, वह जनता और पिछड़े क्षेत्रों के हित को ध्यान में रखकर ही लेगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष कर्मचारियों के हितों की बात करता है, लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार की नीतियों से खुश होकर किसी भी कर्मचारी ने हड़ताल नहीं की है।

बाढ़ नियंत्रण के लिए 150 से अधिक प्रोजेक्ट्स

सदन में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी बाढ़ नियंत्रण को लेकर जवाब दिया। उन्होंने बताया कि  प्रदेश में बाढ़ रोकने के लिए 150 से अधिक परियोजनाओं पर काम चल रहा है।  सरकार इन योजनाओं की लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। बाढ़ के खतरे को देखते हुए हर साल 15 जून तक सभी जरूरी काम पूरे कर लिए जाते हैं, ताकि मानसून के दौरान जनता को परेशानी न हो।

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