G7 Summit 2026: फ्रांस में पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की ‘जुगलबंदी’, ट्रंप की वापसी के बाद 16 महीने में पहली मुलाकात

Lucknow Focus News Desk: फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-लेस-बैंस में आयोजित 52वें जी7 (G7) शिखर सम्मेलन से इस दशक की सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय तस्वीर सामने आई है। इस वैश्विक मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बेहद गर्मजोशी और आत्मीयता से भरी मुलाकात देखी गई।
फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप की दोबारा ऐतिहासिक वापसी के बाद, पिछले 16 महीनों में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह पहली आमने-सामने की (Face-to-Face) मुलाकात है। इस बातचीत की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही तेजी से वायरल हो गए हैं, जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते का खाका तैयार, लेकिन हस्ताक्षर का इंतजार
इस बहुप्रतीक्षित मुलाकात के पीछे भारत और अमेरिका के बेहद गहरे रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं। समिट के इतर दोनों देशों के राजनयिकों के बीच एक बड़े और महत्वाकांक्षी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) का पूरा खाका पहले ही तैयार किया जा चुका है, जिस पर पिछले कई महीनों से दोनों देशों के विदेश और वाणिज्य मंत्रालय लगातार काम कर रहे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का बयान: हालांकि, अमेरिकी प्रशासन और अधिकारियों ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि इस बेहद व्यस्त शिखर सम्मेलन के दौरान किसी भी अंतिम समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। इसके बावजूद, लंबे समय बाद हुई यह आमने-सामने की मुलाकात दोनों वैश्विक नेताओं को व्यापारिक ढांचे की व्यक्तिगत समीक्षा करने और पुरानी तकनीकी व शुल्क संबंधी बाधाओं को सुलझाने का एक बड़ा और निर्णायक मौका दे रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर मंथन
द्विपक्षीय व्यापार के अलावा, इस मुलाकात में मौजूदा वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां भी शीर्ष एजेंडे में शामिल रहने की उम्मीद है। वर्तमान में पश्चिम एशिया (Mid-East Crisis) में जारी भीषण भू-राजनीतिक संकट के बीच दोनों देशों की नौसेनाओं का समन्वय बेहद जरूरी हो गया है।
समुद्री व्यापार पर खतरा: पश्चिम एशिया संकट के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भारतीय वाणिज्यिक और व्यापारिक जहाजों (Commercial Ships) की सुरक्षा इस समय नई दिल्ली के लिए एक बेहद गंभीर चुनौती बनी हुई है।
रणनीतिक साझेदारी: इस मुलाकात की पृष्ठभूमि में उम्मीद जताई जा रही है कि भारत और अमेरिका मिलकर इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में सुरक्षित व्यापार प्रवाह सुनिश्चित करने और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर एक साझा रणनीति तैयार करेंगे।
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