राहुल गांधी की सदस्यता पर सस्पेंस: सरकार नहीं लाएगी विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव, पर भाजपा ने ‘प्लान-बी’ से बढ़ाई मुश्किलें

Lucknow Focus News Desk: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया भाषण को लेकर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा अपडेट यह है कि केंद्र सरकार उनके खिलाफ ‘विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव’ (Privilege Motion) नहीं लाएगी। हालांकि, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि राहुल गांधी की मुश्किलें खत्म हो गई हैं। भाजपा ने अब एक नई रणनीति के तहत उनकी संसद सदस्यता को निशाने पर लिया है।
क्या है भाजपा का ‘प्लान-बी’?
भले ही सरकार प्रस्ताव न लाए, लेकिन भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक अलग ‘मूल प्रस्ताव’ (Substantive Motion) दायर कर दिया है। दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि राहुल गांधी के ‘अनैतिक आचरण’ की जांच के लिए एक संसदीय समिति बनाई जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि आरोप सही पाए जाएं, तो उनकी सदस्यता खत्म करने पर विचार हो।
भाजपा का आरोप है कि राहुल ने पूर्व सेना प्रमुख की एक अप्रकाशित किताब का गलत संदर्भ देकर सेना और प्रधानमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश की है।
भाषण के अंश हटाने की तैयारी
भाजपा के चीफ व्हिप संजय जायसवाल ने राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को सदन की कार्यवाही (Records) से हटाने का औपचारिक नोटिस दिया है। पार्टी का दावा है कि राहुल द्वारा लगाए गए आरोप ‘प्रमाणित’ नहीं थे और तथ्यों से परे थे। सूत्रों की मानें तो जल्द ही सदन की कार्यवाही से इन ‘आपत्तिजनक’ हिस्सों को हटाया जा सकता है।
‘चाहें तो फांसी पर लटका दो’
भाजपा की इस घेराबंदी पर कांग्रेस ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा हमें इन नोटिसों से कोई फर्क नहीं पड़ता। पिछली बार भी सदस्यता खत्म की गई थी, लेकिन जनता ने उन्हें और बड़े अंतर से जिताकर भेजा। भाजपा दोहरा मापदंड अपना रही है। आप चाहें तो हमें फांसी पर लटका दें, लेकिन हम सच बोलना बंद नहीं करेंगे।
अब गेंद लोकसभा अध्यक्ष के पाले में
फिलहाल पूरा मामला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास है। यदि वह निशिकांत दुबे के ‘मूल प्रस्ताव’ को स्वीकार कर लेते हैं, तो इस पर सदन में चर्चा और वोटिंग हो सकती है। ऐसी स्थिति में बहुमत के आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
