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Health Alert: बैठे-बैठे बार-बार पैर हिलाने की है आदत? तो इसे मामूली समझकर न करें नजरअंदाज

Lucknow Focus News Desk: अक्सर आपने अपने घर, दफ्तर या सार्वजनिक स्थानों पर कई ऐसे लोगों को देखा होगा, जो कुर्सी या सोफे पर बैठते ही अनजाने में अपना पैर हिलाने लगते हैं। कई बार लोग इसे एक सामान्य सी आदत या औपचारिकता मानकर छोड़ देते हैं, तो कई बार टोकने पर ही उन्हें अहसास होता है कि वे ऐसा कर रहे हैं।

लेकिन क्या यह वाकई सिर्फ एक मामूली आदत है, या फिर यह आपके शरीर और मस्तिष्क से जुड़ा कोई गुप्त संकेत है? स्वास्थ्य और चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, अनजाने में लगातार पैर हिलाने के पीछे कई गहरे शारीरिक, मानसिक और न्यूरोलॉजिकल (तंत्रीय) कारण छिपे हो सकते हैं। आइए विज्ञान के नजरिए से समझते हैं इस आदत के पीछे की असली वजह।

1. मानसिक तनाव, चिंता और ‘फाइट ऑर फ्लाइट’ मोड (Anxiety & Stress)

जब कोई व्यक्ति अत्यधिक मानसिक दबाव, परीक्षा के तनाव, या किसी महत्वपूर्ण बिजनेस मीटिंग में होता है, तो उसका शरीर अनजाने में “फाइट ऑर फ्लाइट” (Fight or Flight) मोड में चला जाता है।

हार्मोनल बदलाव: इस स्थिति में मस्तिष्क शरीर में एड्रेनालिन (Adrenaline) जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर तेजी से बढ़ा देता है।

अतिरिक्त ऊर्जा: एड्रेनालिन के बढ़ने से शरीर में अचानक अत्यधिक ऊर्जा पैदा होती है, जिससे मांसपेशियों में एक प्रकार की बेचैनी या छटपटाहट होने लगती है।

सेल्फ-सूथिंग बिहेवियर: मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, इस आंतरिक बेचैनी को शांत करने और तनाव से अस्थायी राहत पाने के लिए इंसान का शरीर अनजाने में पैर हिलाने या उंगलियां थपथपाने लगता है। इसे विज्ञान की भाषा में ‘सेल्फ-सूथिंग बिहेवियर’ (खुद को शांत करने का तरीका) कहा जाता है।

2. ध्यान केंद्रित करना और मस्तिष्क को सक्रिय रखना (Focus & Concentration)

हैरानी की बात यह है कि हर बार पैर हिलाना किसी परेशानी या चिंता का ही संकेत नहीं होता। कुछ लोगो के लिए यह उनके काम पर ध्यान केंद्रित (Focus) करने का एक प्राकृतिक माध्यम होता है।

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि जब हम लगातार बैठकर कोई दिमागी काम कर रहे होते हैं, तो पैर हिलाने जैसी हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधियों से मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह (Blood Circulation) बेहतर हो जाता है। यह प्रक्रिया सुस्त पड़ रहे दिमाग को अचानक अलर्ट और सक्रिय कर देती है, जिससे व्यक्ति की एकाग्रता और सोचने की क्षमता में सुधार होता है।

3. पोषक तत्वों की कमी और न्यूरोलॉजिकल विकार (Nutritional Deficiency)

लगातार पैर हिलाने के पीछे केवल मानसिक कारण ही नहीं, बल्कि शरीर के भीतर की कुछ कमियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं:

आयरन की कमी (Iron Deficiency): शरीर में आयरन और हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने से पैरों की नसों में बेचैनी बढ़ जाती है, जिससे व्यक्ति पैर हिलाने पर मजबूर होता है।

रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (RLS): चिकित्सा विज्ञान में इसे एक न्यूरोलॉजिकल विकार माना जाता है। इसमें व्यक्ति जब आराम की स्थिति में होता है, तो उसके पैरों में अजीब सी खुजली, रेंगने या खिंचाव का अहसास होता है, जिसे कम करने के लिए वह लगातार पैर हिलाता है। यह समस्या विशेषकर शाम के समय या रात को सोते वक्त ज्यादा बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों की सलाह: कब जरूरी है डॉक्टर से मिलना?

यद्यपि बैठते समय पैर हिलाना हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन यदि यह आदत अत्यधिक बढ़ जाए, आपके नियंत्रण से बाहर होने लगे, या फिर इसके कारण आपकी रोजमर्रा की गतिविधियां और रात की नींद प्रभावित होने लगे, तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें। ऐसी स्थिति में किसी न्यूरोलॉजिस्ट या जनरल फिजिशियन से परामर्श लेकर शरीर में विटामिन्स की जांच कराना बेहद जरूरी हो जाता है।

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