उत्तर प्रदेश

गर्भावस्था में जटिलताओं से बचाव, बाराबंकी में जागरूकता अभियान

बाराबंकी जिले में प्रसार संस्था एवं सॉंझा प्रयास के संयुक्त तत्वाधान में सुरक्षित गर्भ समापन एवं गर्भनिरोधक सेवाओं को लेकर उत्तर प्रदेश के गैर सरकारी संगठनों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन स्थानीय सीएमओ कार्यालय के सभागार में किया गया। कार्यशाला में विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

गर्भपात के कानूनी पहलुओं पर बाराबंकी में विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए प्रसार संस्था के कार्यक्रम संयोजक अभिषेक सिंह ने उपस्थित स्वयं सेवी संगठनों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने अनचाहे गर्भ और गर्भपात के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार जहां एक ओर इस कुरीति को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है, वहीं गैर सरकारी संगठन ‘सांझा प्रयास’ भी अपने सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से इस दिशा में निरंतर कार्यरत है। उन्होंने इस कार्यशाला को संस्थाओं के मध्य समन्वय स्थापित करने की एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया।

प्रसार संस्था के सचिव शिशुपाल यादव ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से एमटीपी एक्ट संशोधन 2021 के मुख्य बदलावों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब विशेष श्रेणियों की महिलाओं के लिए गर्भपात की ऊपरी सीमा 20 सप्ताह से बढ़ाकर 24 सप्ताह कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, पर्याप्त भ्रूण विकृति के मामलों में मेडिकल बोर्ड की अनुमति से गर्भावस्था के दौरान किसी भी समय गर्भपात कराया जा सकता है। यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि गर्भनिरोधक साधनों की विफलता की स्थिति में अविवाहित महिलाएं भी गर्भपात सेवाओं का लाभ उठा सकती हैं। उन्होंने बताया कि 20 सप्ताह तक के गर्भपात के लिए एक प्रशिक्षित डॉक्टर और 20 से 24 सप्ताह के गर्भपात के लिए दो प्रशिक्षित डॉक्टरों की राय आवश्यक है। इसके साथ ही, उन्होंने गर्भपात संबंधी जानकारी की गोपनीयता को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया है।

परिवार नियोजन सेवाओं को बढ़ावा देने पर जोर

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अवधेश कुमार ने असुरक्षित गर्भपात के गंभीर परिणामों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिदिन लगभग 13 महिलाओं की मृत्यु असुरक्षित गर्भपात के कारण हो जाती है और सैकड़ों महिलाएं गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करती हैं। उन्होंने बताया कि देश में होने वाली मातृ-मृत्यु में 8 प्रतिशत का कारण असुरक्षित गर्भपात है। डॉ. कुमार ने महिलाओं से अपील की कि माहवारी में देरी होने या अनचाहे गर्भ की आशंका होने पर बिना किसी विलंब के नजदीकी आशा कार्यकर्ता, एएनएम या डॉक्टर से संपर्क करें। उन्होंने संशोधित एमटीपी एक्ट 2021 के तहत 20-24 सप्ताह तक के गर्भ को भी कानूनी रूप से समाप्त कराने की जानकारी दी और बताया कि 9 सप्ताह तक के गर्भ को दवाओं के माध्यम से भी समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गर्भपात जितना जल्दी कराया जाता है, वह उतना ही सरल और सुरक्षित होता है।

महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों पर बाराबंकी में महत्वपूर्ण कार्यशाला

अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजीव सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि गर्भपात का निर्णय एक महिला के लिए अत्यंत कठिन हो सकता है और इस प्रक्रिया के दौरान वह कई तरह की भावनाओं का अनुभव कर सकती है। उन्होंने परिवार और पति से अपील की कि वे महिला के निर्णय का सम्मान करें और सुरक्षित एवं कानूनी गर्भपात सेवाओं तक पहुंचने में उसकी सहायता करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सही जानकारी और आपसी सहयोग से देश में असुरक्षित गर्भपात से होने वाली जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

कार्यशाला में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने सुरक्षित गर्भ समापन और गर्भनिरोधक सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया।

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