अब पेट्रोल पंपों पर मिलेगी चॉइस! गाड़ी के इंजन के हिसाब से चुन सकेंगे E20 से E30 तक पेट्रोल, जानें सरकार का नया प्लान

Lucknow Focus News Desk: देश के करोड़ों वाहन मालिकों (कार और बाइक चालकों) के लिए आने वाले दिन ईंधन भरवाने के लिहाज से पूरी तरह बदलने वाले हैं। केंद्र सरकार पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को एक बेहद अनोखा और नया विकल्प देने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। इस नए प्लान के तहत जब आप पेट्रोल पंप पर जाएंगे, तो आपको वहां डीजल-पेट्रोल के अलावा इथेनॉल मिश्रण के कई अलग-अलग विकल्प दिखाई देंगे।
उपभोक्ता अपनी गाड़ी के इंजन की क्षमता, उसकी मैन्युफैक्चरिंग गाइडलाइन और अनुकूलता (Compatibility) के हिसाब से खुद तय कर सकेंगे कि उन्हें कितने प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अपनी गाड़ी में डलवाना है। सरकार पेट्रोल पंपों पर इसकी पूरी सूची और विकल्प उपलब्ध कराने की तैयारी में है।
सरकारी और निजी तेल कंपनियों को इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की सलाह
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों— इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के साथ-साथ निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों जैसे जियो-बीपी (Jio-bp), नायरा एनर्जी (Nayara Energy) और शेल (Shell) को भी अपने पेट्रोल पंपों पर नया बुनियादी ढांचा (Infrastructure) विकसित करने की सलाह दी है।
कंपनियों से कहा गया है कि वे भविष्य में पंपों पर ई20 (E20), ई22 (E22), ई25 (E25) और ई30 (E30) ईंधन बेचने के लिए अलग से नोजल और डिस्पेंसिंग मशीनें तैयार रखें।
क्या है E20 का गणित?
उदाहरण के लिए, ई20 (E20) पेट्रोल का मतलब होता है कि उस ईंधन में 80 फीसदी शुद्ध पेट्रोल है और 20 फीसदी इथेनॉल मिलाया गया है। इसी तरह E30 में 30 फीसदी इथेनॉल का मिश्रण होगा।
उपभोक्ताओं के असमंजस और चिंताओं को दूर करने की कोशिश
सरकार का यह नया कदम उपभोक्ताओं के मन में इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर चल रही दो सबसे बड़ी चिंताओं और बाजार की बहस को दूर करने के लिए उठाया जा रहा है:
माइलेज कम होने का डर: वाहन मालिकों के बीच यह चिंता आम है कि पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, गाड़ी का माइलेज (औसत) उतना ही कम हो सकता है।
इंजन को नुकसान की आशंका: पुराने वाहनों या बीएस-4 (BS-IV) श्रेणी की गाड़ियों के इंजन के रबर-प्लास्टिक पार्ट्स और पाइप्स को ज्यादा इथेनॉल वाले ईंधन से नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
इसी असमंजस को खत्म करने के लिए सरकार ने तय किया है कि किसी पर भी ज्यादा इथेनॉल वाला ईंधन थोपा नहीं जाएगा। जिनकी गाड़ियां नए इंजन (E20 या उससे ऊपर के लिए कंपैटिबल) वाली हैं, वे ज्यादा मिश्रण वाला सस्ता विकल्प चुन सकेंगे और पुराने वाहन मालिक अपनी मर्जी से शुद्ध या कम इथेनॉल वाला तेल ले सकेंगे।
BIS मानकों और ‘फ्लेक्स फ्यूल’ नीति के बाद उठाया कदम
यह बड़ा फैसला नए इथेनॉल मिश्रणों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा हाल ही में तय किए गए मानदंडों और मानकों के बाद आया है। इससे पहले सरकार ने अप्रैल महीने में देश के भीतर पूरी तरह से इथेनॉल (100% Ethanol) से चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) वाहनों को अनुमति देने का एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया था। पेट्रोल पंपों पर मल्टीपल चॉइस देने की यह योजना भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और कच्चे तेल के आयात बिल को कम करने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।



