उत्तर प्रदेश

UP Panchayat Chunav: अखिलेश यादव की वजह से रुकी पंचायत चुनाव की प्रक्रिया, यूपी के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का बड़ा आरोप

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच प्रदेश के पंचायती राज और जिले के प्रभारी मंत्री ओम प्रकाश राजभर का एक बेहद बड़ा और विस्फोटक बयान सामने आया है। राजभर ने यूपी में समय पर पंचायत चुनाव न हो पाने का ठीकरा सीधे तौर पर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सिर पर फोड़ा है।

केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के सफल 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रविवार को अकबरपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित एक पत्रकार वार्ता (Press Conference) को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री राजभर ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कानून-व्यवस्था से लेकर पंचायत चुनाव के मुद्दे पर सपा को जमकर आड़े हाथों लिया।

अखिलेश यादव ने कोर्ट में याचिका लगवाकर बाधित की प्रक्रिया- राजभर

प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने पंचायती राज मंत्री से प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी पर सवाल पूछा, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार की तरफ से तैयारियां पूरी थीं, लेकिन विपक्ष ने इसमें अड़ंगा लगा दिया।

कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया “उत्तर प्रदेश सरकार सूबे में समय से पंचायत चुनाव कराने की तैयारी पूरी तरह कर चुकी थी। लेकिन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जानबूझकर अपने कानूनी सहयोगियों और वकीलों की मदद से माननीय उच्च न्यायालय (High Court) में याचिका दायर करवा दी। इसी कानूनी अड़चन के कारण चुनाव की पूरी प्रक्रिया प्रभावित और बाधित हुई है। वर्तमान में योगी सरकार केवल अदालत के फैसले का इंतजार कर रही है, जैसे ही हरी झंडी मिलेगी, चुनाव कराए जाएंगे।”

“सपा शासन में हुए 1000 दंगे, भाजपा राज में पूरी तरह शांति”

पंचायत चुनाव के साथ-साथ ओम प्रकाश राजभर ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी समाजवादी पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार को बुरी तरह घेरा। उन्होंने यूपी के पुराने सांप्रदायिक दंगों का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव के कार्यकाल पर गंभीर सवाल उठाए।

राजभर ने तीखा हमला बोलते हुए कहा अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए प्रदेश में करीब एक हजार (1,000) छोटे-बड़े दंगे हुए थे, जिनमें टांडा में हुआ दंगा भी शामिल था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान निर्दोष लोग मारे जा रहे थे और पूरा पश्चिमी यूपी सुलग रहा था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री सैफई महोत्सव और अन्य आयोजनों में व्यस्त थे। इसके विपरीत, जब से प्रदेश में भाजपा और सहयोगियों की सरकार आई है, तब से यूपी में अपराधियों पर नकेल कसी गई है और पूरे राज्य में कहीं भी एक भी दंगा नहीं हुआ है।

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