Lucknow-Kanpur Expressway: निर्माण की घटिया गुणवत्ता के चलते टोल टैक्स स्थगित, NHAI अधिकारी पर गिरी गाज, कंपनी ब्लैकलिस्ट

Lucknow Focus News Desk: महज 22 दिन पहले शुरू हुए ₹4,200 करोड़ से अधिक की लागत वाले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (Lucknow-Kanpur Expressway) पर सड़क धंसने और खराब गुणवत्ता की शिकायतों के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा फैसला लिया है। एक्सप्रेसवे की मरम्मत का काम पूरा होने तक टोल संग्रह को पूरी तरह से स्थगित (टोल फ्री) कर दिया गया है। इसके अलावा, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है और निर्माण एजेंसी को अयोग्य घोषित कर दिया गया है।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई: अधिकारी हटाए गए, चार्जशीट जारी
बुधवार को एनएचएआई (NHAI) की लखनऊ यूनिट में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने कार्रवाई का ब्योरा दिया। प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को लापरवाही के चलते पद से हटाकर दिल्ली मुख्यालय स्थानांतरित कर दिया गया है। उनकी जगह बरेली के प्रोजेक्ट डायरेक्टर नवरतन को लखनऊ की जिम्मेदारी दी गई है। पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को चार्जशीट थमाई गई है। उन्हीं के कार्यकाल के दौरान एक्सप्रेसवे का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हुआ था।
इससे पहले निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को परियोजना से हटाते हुए 2 साल के लिएMoRTH, NHAI और NHIDCL की किसी भी परियोजना में भाग लेने से प्रतिबंधित (Debarred) किया जा चुका है।
निर्माण एजेंसी PNC इंफ्राटेक पर बड़ा एक्शन
टेंडर प्रक्रिया से बाहर: 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड (PNC Infratech) को एनएचएआई के भावी टेंडरों के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।
लागत और नुकसान की भरपाई: एजेंसी को अपने खर्च पर (लगभग ₹3 करोड़) प्रभावित हिस्सों की मरम्मत करने का निर्देश दिया गया है। टोल बंद होने से होने वाले राजस्व के नुकसान की वसूली भी निर्माण एजेंसी से ही की जाएगी।
रेटिंग डाउनग्रेड व डिबारमेंट नोटिस: एजेंसी की रेटिंग डाउनग्रेड करने के साथ ही स्वतंत्र इंजीनियरिंग फर्म थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी डिबारमेंट नोटिस जारी किया गया है।
IIT खड़गपुर के विशेषज्ञ कर रहे तकनीकी जांच
सड़क की सतह और खुरदरेपन की जांच के लिए लेजर प्रोफिलोमीटर (Laser Profilometer) का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही, आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर के.एस. रेड्डी के नेतृत्व में पेवमेंट विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र टीम तकनीकी जांच में जुटी है, जो एक हफ्ते के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।
13 जुलाई को इस 63 किमी लंबे एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हुआ था। इस पर चार पहिया वाहनों से एक तरफ का टोल ₹275 वसूला जा रहा था, जो देश के सबसे महंगे टोल दरों में से एक था। महज 20 दिनों के भीतर एक्सप्रेसवे पर 5 अलग-अलग स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आई थीं।




