UP का नया इंडस्ट्रियल मॉडल: अब बलिया, हाथरस और चित्रकूट में लगेंगे बड़े कारखाने, छोटे जिलों की बदलेगी किस्मत

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास के असंतुलन को दूर करने के लिए एक ‘मास्टर प्लान’ तैयार किया है। अब निवेश केवल नोएडा या लखनऊ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश के छोटे और पिछड़े जिलों को बड़े औद्योगिक केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) ने बलिया, हाथरस, फतेहपुर, बाराबंकी और चित्रकूट जैसे जिलों में जमीन पर काम शुरू कर दिया है।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच
नई रणनीति के तहत ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना को औद्योगिक क्षेत्रों से सीधे जोड़ा जा रहा है। पहले चरण में मिनी इंडस्ट्रियल एस्टेट और ‘फ्लैटेड फैक्ट्री’ कॉम्प्लेक्स के बजाय अब बड़े औद्योगिक जोन विकसित किए जा रहे हैं। औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के तहत इन जिलों में फैक्ट्री लगाने वाले उद्यमियों को सस्ती जमीन, स्टांप ड्यूटी में 100% छूट और अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है।
बंद पड़ी मिलों का होगा ‘री-यूटिलाइजेशन’
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने बताया कि विकास की राह में आ रही तकनीकी अड़चनों को दूर कर दिया गया है। बलिया, हाथरस और बाराबंकी जैसे जिलों के इंडस्ट्रियल लेआउट को मंजूरी दे दी गई है। प्रदेश में जो औद्योगिक इकाइयां या कताई मिलें (Spinning Mills) वर्षों से बंद पड़ी हैं, उनकी जमीन को वापस लेकर नए निवेशकों को आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
महानगरों पर घटेगा दबाव, गांव में मिलेगा रोजगार
सरकार की इस पहल के पीछे दो मुख्य उद्देश्य हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से युवाओं को दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा। पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में निवेश का समान वितरण सुनिश्चित करना, जिससे क्षेत्रीय विषमता खत्म हो सके।आने वाले समय में इन छोटे जिलों के लिए विशेष ‘इन्वेस्टर रोड शो’ भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि स्थानीय और वैश्विक निवेशकों को इन क्षेत्रों की संभावनाओं से रूबरू कराया जा सके।




