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Monsoon Care Tips: बारिश के मौसम में AC का गलत तापमान बिगाड़ सकता है सेहत, जानें सही इस्तेमाल का तरीका

Lucknow Focus News Desk: बारिश का मौसम भले ही भीषण गर्मी से राहत दिलाता हो, लेकिन इस दौरान हवा में बढ़ने वाली उमस और नमी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। अक्सर लोग उमस से राहत पाने के लिए घरों और दफ्तरों में एसी का तापमान 16 से 18 डिग्री सेल्सियस तक कम कर देते हैं। लेकिन डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान बहुत कम तापमान पर एसी चलाना सेहत के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है।

कम तापमान पर एसी चलाने के 4 प्रमुख नुकसान

  1. इम्यून सिस्टम पर असर और वायरल संक्रमण: जब कोई व्यक्ति बाहर की गर्म और उमस भरी हवा से अचानक 16-18°C ठंडे कमरे में आता है, तो शरीर को तापमान में अचानक आए इस बदलाव को झेलना पड़ता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) प्रभावित होती है और सर्दी-जुकाम, बुखार तथा वायरल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
  2. गले में खराश, खांसी और जलन: कम तापमान पर देर तक एसी चलाने से कमरे की हवा शुष्क हो जाती है। यह शुष्क हवा गले और नाक की अंदरूनी झिल्ली में सूखापन पैदा करती है, जिससे गले में जलन, खराश, खांसी और आवाज बैठने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  3. फफूंदी (Mold) और एलर्जी का खतरा: मानसून की नमी के कारण एसी के फिल्टर और कूलिंग कॉइल पर धूल और फफूंदी (Mold) तेजी से जमा होती है। अगर समय पर फिल्टर की सफाई न हो, तो ये सूक्ष्म कण पूरे कमरे में फैल जाते हैं, जिससे छींक आना, आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और अस्थमा (Asthma) के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है।
  4. मांसपेशियों में अकड़न और जोड़ों का दर्द: लगातार बहुत ठंडी हवा के संपर्क में रहने से मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं। जिन लोगों को गठिया (Arthritis), सर्वाइकल या कमर दर्द की समस्या है, ठंडी हवा उनके दर्द को बढ़ा सकती है।

मानसून में AC चलाने का सही तरीका (विशेषज्ञों के सुझाव)

आदर्श तापमान रखें: एसी का तापमान हमेशा 24°C से 26°C के बीच सेट करें।

ड्राय मोड (Dry Mode) का उपयोग करें: उमस (Humidity) दूर करने के लिए कूल मोड के बजाय ‘Dry Mode’ का इस्तेमाल करें।

फिल्टर की सफाई: हर 15 से 30 दिनों में एसी के फिल्टर को जरूर साफ करें।

सीधी हवा से बचें: ध्यान रखें कि एसी की ठंडी हवा सीधे आपके शरीर, गर्दन या पीठ पर न पड़े।

वेंटीलेशन और हाइड्रेशन: दिन में कुछ समय कमरे की खिड़कियां खोलकर ताजी हवा आने दें और पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।

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