PM जन औषधि योजना: गरीबों के लिए वरदान, 20 रुपये में मिल रही 100 रुपये वाली दवा

Lucknow Focus News Desk: भारत, जो दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, वहाँ लोगों के लिए इलाज हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। आर्थिक तंगी के कारण बहुत से लोग बीच में ही इलाज छोड़ देते थे। लेकिन, प्रधानमंत्री जन औषधि योजना इन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। इस योजना के तहत लोगों को सस्ती, अच्छी और जेनेरिक दवाइयां मिलती हैं।
क्या है जन औषधि योजना?
नवंबर 2008 में शुरू हुई इस योजना को मोदी सरकार ने नई गति दी है। इसका मुख्य मकसद हर वर्ग के लोगों को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराना है, ताकि उनका आर्थिक बोझ कम हो सके। इन केंद्रों पर मिलने वाली हर दवा को WHO-GMP मानकों के तहत जांचा जाता है, जिससे यह ब्रांडेड दवाओं जितनी ही असरदार होती हैं।
जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयां ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 50 से 80 फीसदी तक सस्ती होती हैं। उदाहरण के लिए, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज की जो दवा बाजार में ₹100 की मिलती है, वही यहाँ सिर्फ ₹20 से ₹30 में उपलब्ध है।
देश में 12 हजार से ज़्यादा केंद्र
साल 2013 तक देश में सिर्फ 80 से 100 जन औषधि केंद्र थे, लेकिन 2025 तक इनकी संख्या बढ़कर 12,000 से ज़्यादा हो गई है। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक इस संख्या को 25,000 तक पहुंचाना है। ये केंद्र ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में खोले जा रहे हैं, ताकि हर जगह के लोगों को फायदा मिल सके।
किसे मिला सबसे ज़्यादा फायदा?
बुजुर्ग मरीज: जिन्हें रोज़ाना ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और दिल की बीमारियों की दवा लेनी पड़ती है।
गरीब और ग्रामीण परिवार: जो महंगी दवाइयाँ नहीं खरीद पाते थे।
महिलाएं और बच्चे: जिनके लिए आयरन, कैल्शियम और विटामिन की दवाएं बहुत कम कीमत पर उपलब्ध हैं।
इस योजना के तहत सिर्फ दवाएं ही नहीं, बल्कि सर्जिकल सामान और उपकरण जैसे ब्लड प्रेशर मशीन भी बहुत कम दामों में मिलते हैं। दिल्ली के जीटीबी अस्पताल के डॉ. अजीत कुमार ने बताया कि जेनेरिक दवाओं में वही सॉल्ट होते हैं जो ब्रांडेड दवाओं में होते हैं, इसलिए वे भी उतनी ही फायदेमंद होती हैं।




