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शनिवार को क्यों चढ़ाते हैं पीपल के नीचे तेल


पीपल के नीचे शनिदेव की पूजा का खास माहात्म
हिंदुओं में शनिवार को पीपल के पेड़ पर तेल चढ़ाने का खास महत्व है। इस दिन पीपल की खास पूजा भी की जाती है। क्या आप जानते हैं ऐसा क्यों किया जाता है? यह काम कुछ खास लोग करते हैं। वे खास लोग कौन होते हैं? क्या आप यह बात जानते हैं?
शास्त्रों में बताया गया है कि किस तरह शनि की साढ़ेसाती या ढैया की दशा होने पर व्यक्ति कितना परेशान होता है। ऐसी परेशानियां भगवान शिव सहित बहुत से देवताओं को भी झेलनी पड़ी हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि शनि की दशा से बचने के लिए या उसके प्रभाव को कम करने के लिए क्या किया जाना चाहिए? शनिदेव की पूजा किस खास तरीके से की जानी चाहिए?
आप जानते हैं कि शनि बड़े क्रोधी देवता माने जाते हैं। कहते हैं कि उनकी दशा भगवान शिव, भगवान राम, राजा हरिश्चचंद्र, राजा नल और राजा विक्रमादित्य पर भी पड़ी थी। ये देवता और महाराजा भी शनि के कोप से नहीं बच पाए। उन्हें तरह-तरह के कष्ट उठाने पड़े।
कहते हैं जब भगवान शिव पर शनि की वक्रदृष्टि पड़ी तो उनकी पत्नी मां सती हवनकुंड में सती हो गईं। फिर भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तीनों भुवन में नाचने लगे। इस पर देवताओं की विनती पर भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से मां सती के शरीर के 52 टुकड़े किए और शिव के क्रोध को शांत किया। इसी तरह जब भगवान राम पर शनि की साढ़ेसाती पड़ी तो उन्हें 14 वर्ष का वनवास हुआ। यही साढ़ेसाती जब रावण पर पड़ी तो उसका वध हुआ। दूसरी तरफ, शनि की बुरी दशा आने पर राजा हरिश्चंद्र को अपना राजपाट छोड़कर काशी के डोमराज के यहां नौकरी करनी पड़ी। राजा नल को कोल्हू चलाकर तेल निकालने की नौकरी करनी पड़ी। विक्रमादित्य पर जब शनि की तिरछी नजर पड़ी तो उन्हें नौलखा हार की चोरी का आरोप झेलना पड़ा। जब ये महान लोग शनि के कोप से नहीं बच पाए तो सामान्य मनुष्य भला क्या चीज है।
शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे तेल खास करके सरसों का तेल चढ़ाने की खास परंपरा है। मान्यता है कि इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं। इस दिन सूर्यपुत्र शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए लोग पीपल के पेड़ के नीचे तेल चढ़ाते हैं। इनमें वे लोग खास तौर पर तेल चढ़ाते हैं जिन पर शनि की साढ़ेसाती या ढैया की दशा चल रही होती है। इसके पीछे भी एक कहानी है। आइए उसे जान लेते हैं-
सूर्य और छाया के पुत्र शनि युवावस्था में बहुत ही सुंदर थे। उनकी सुंदरता पर मोहित होकर एक गंधर्व ने अपनी कन्या कंकाली का उनसे विवाह किया। लेकिन विवाह के बाद भी इंद्रलोक की अपसराएं शनि पर जान छिड़का करती थीं। एक बार की बात है कि शनि इंद्र की सभा में अप्सराओं का नृत्य देखने गए थे। वहां पर एक अप्सरा उन पर मोहित हो गई। यह बात कंकाली को पता चली तो उसने शनिदेव को श्राप दे दिया कि आप कुरूप हो जाएं और आप जिसे भी सीधी दृष्टि से देखें तो उस पर साढ़ेसाती का प्रभाव हो जाए।
इस श्राप के बाद शनिदेव ने भगवान शिव की तपस्या की। भगवान शिव प्रसन्न हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा। शनिदेव ने उनसे वरदान मांगा कि मैं सृष्टि पर सीधी दृष्टि डाल सकूं। इस पर भगवान शिव ने वरदान दिया कि धरती पर शनिवार को जो व्यक्ति पीपल के पेड़ के नीचे तेल चढ़ाएगा उस पर पड़ने वाली तुम्हारी दृष्टि शुभ दृष्टि में बदल जाएगी।
ऐसी मान्यता है कि तभी से शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे तेल दान करके पूजा करने की शुरुआत हुई। जिन पर शनि की बुरी दशा चल रही हो उन्हें शनिवार को यह पूजा अवश्य करनी चाहिए। इससे शनि का प्रकोप कम या नगण्य हो जाएगा।
(प्रतीकात्मक फोटो-सोशल मीडिया)

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