बाराबंकी में संस्कृत की गूंज, ‘आदि शक्ति राम शक्ति’ नाटक ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ और आदर्श सेवा संस्थान बाराबंकी के साझा प्रयासों से आयोजित 15 दिवसीय संस्कृत नाट्य कार्यशाला का भव्य समापन हुआ। अशोकपुर चाचू सराय के रामलीला मंच पर जब महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की अमर रचना ‘राम की शक्ति पूजा’ पर आधारित नाटक “आदि शक्ति राम शक्ति” का मंचन हुआ, तो हजारों की संख्या में मौजूद दर्शक भाव-विभोर हो उठे।
मुख्य अतिथि का संबोधन: संस्कृत है मानवीय मूल्यों की संवाहक
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व विधायक शरद कुमार अवस्थी ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश देने वाली जीवन पद्धति है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारी संस्कृति में निहित ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ की भावना ही विश्व शांति का मार्ग प्रशस्त करती है। विशिष्ट अतिथि रत्नेश कुमार और अमित भैया “राम जी” ने भी संस्कृत को ‘देववाणी’ बताते हुए इसकी समृद्ध विरासत पर चर्चा की।
15 दिनों की कड़ी मेहनत लाई रंग
नाटक के निर्देशक ललित कुमार पोखरिया ने बताया कि पिछले 15 दिनों से कलाकारों को न केवल अभिनय, बल्कि संस्कृत भाषा के शुद्ध उच्चारण और नाट्यशास्त्र के रस सिद्धांतों का गहन प्रशिक्षण दिया गया था। लखनऊ विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में तैयार हुए इन कलाकारों ने मंच पर अपनी भंगिमाओं और संवाद अदायगी से वातावरण को जीवंत कर दिया।
कलाकारों ने बांधा समां
मंच पर राम की भूमिका में सुमित श्रीवास्तव ने अपनी सात्विक गरिमा से सबको प्रभावित किया।
लक्ष्मण: अभिनव सिंह
हनुमान: अभिजीत सिंह
माँ भीमा: आकांक्षा पांडे
इन सभी कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों की खूब तालियाँ बटोरीं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 20 कलाकारों ने इस पूरे मंचन को सफल बनाने में योगदान दिया।
हजारों दर्शकों की मौजूदगी और भव्य स्वागत
कार्यक्रम के आयोजक डॉ. सुरेश चंद्र शर्मा ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण और अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन कवि हरिदत्त पांडे ने किया। रामलीला सेवा समिति के सदस्यों और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से यह आयोजन एक उत्सव में बदल गया। अंत में डॉ. शर्मा ने सभी प्रशिक्षुओं और दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया।




