सुबह-सुबह ओस से भीगी घास पर नंगे पांव चलने से होते हैं ये जबरदस्त फायदे, जानिए एक्सपर्ट की राय

Lucknow Focus News Desk: भागदौड़ भरी जिंदगी में अगर आप दिन की शुरुआत सुकून और सेहत के साथ करना चाहते हैं, तो सुबह-सुबह ओस से भीगी घास पर नंगे पांव टहलना आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। यह न सिर्फ मानसिक तनाव कम करता है, बल्कि शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने, आंखों की रोशनी सुधारने और अच्छी नींद दिलाने में भी कारगर माना जाता है।
क्यों फायदेमंद है घास पर नंगे पांव चलना?
- आंखों की रोशनी होती है तेज
घास पर चलने के दौरान पैरों के तलवों में मौजूद एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर स्वाभाविक रूप से दबाव पड़ता है, जो आंखों की नसों से जुड़े होते हैं। इससे आंखों की मांसपेशियों को राहत मिलती है और रक्त संचार बेहतर होता है। इसके साथ ही, हरे रंग की घास को देखने से भी आंखों को ठंडक और ताजगी का अनुभव होता है।
- तनाव होता है कम, नींद होती है बेहतर
सुबह की ताजगी और नंगे पांव चलने से तनाव के हार्मोन यानी कॉर्टिसोल का स्तर कम होता है। इससे मन शांत होता है और मानसिक रूप से शांति मिलती है। यही वजह है कि जो लोग सुबह नंगे पांव टहलते हैं, उन्हें रात में अच्छी और गहरी नींद आती है।
- रक्त संचार में आता है सुधार
घास पर बिना जूते या चप्पल के चलने से पैरों की नसों में रक्त प्रवाह बेहतर होता है, जिससे शरीर के अन्य हिस्सों तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व पहुंचते हैं। इससे पैरों में सुन्नपन, जकड़न या थकान जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
- इम्युनिटी होती है मजबूत
यह एक प्राकृतिक थेरेपी की तरह काम करता है। रोजाना कुछ समय के लिए घास पर टहलना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाता है, जिससे आप सर्दी-जुकाम जैसे संक्रमणों से बच सकते हैं।
- मिलता है प्राकृतिक विटामिन-डी
सुबह की हल्की धूप में टहलना शरीर के लिए जरूरी विटामिन D का अच्छा स्रोत है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है, इम्यून सिस्टम को सुधारता है और मूड को भी पॉजिटिव बनाए रखने में मदद करता है।
- संतुलन और मजबूती में होता है सुधार
नंगे पांव चलने से पैरों की छोटी मांसपेशियां और टेंडन सक्रिय होते हैं, जिससे पैरों की पकड़, संतुलन और चाल बेहतर होती है।
कितनी देर चलना है जरूरी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह के समय घास पर नंगे पांव 15 से 30 मिनट तक चलना बेहद लाभकारी होता है। यदि आपके पास अधिक समय है, तो आप इसे 1 घंटे तक भी बढ़ा सकते हैं। ध्यान रखें कि सबसे अच्छा समय वही होता है जब घास पर ओस की बूंदें जमी हों और सूरज की हल्की किरणें धरती पर उतर रही हों।
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