UP Defence Corridor: पश्चिम एशिया के युद्ध ने यूपी को बनाया ‘ग्लोबल डिफेंस हब’

Lucknow Focus News Desk: दुनिया के नक्शे पर चल रहे युद्धों चाहे वो रूस-यूक्रेन संघर्ष हो या पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) का तनाव हो, ने उत्तर प्रदेश के डिफेंस सेक्टर की किस्मत बदल दी है। वैश्विक रक्षा जरूरतों में आए अचानक उछाल से यूपी का डिफेंस उत्पादन 12 हजार करोड़ रुपये से छलांग लगाकर जल्द ही 24 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने के आसार हैं। उत्तर प्रदेश अब केवल खेती या पर्यटन नहीं, बल्कि दुनिया को सुरक्षा देने वाला ‘हथियारों का कारखाना’ बन रहा है।
यूपी के इन ‘स्मार्ट हथियारों’ की दुनिया में मची है धूम
युद्ध अब केवल सैनिकों का नहीं, बल्कि ‘टेक्नोलॉजिकल वॉर’ बन चुका है। यूपी की कंपनियां इसी बदलाव का फायदा उठा रही हैं।
एंटी-ड्रोन सिस्टम: यूपी में बने एडवांस एंटी-ड्रोन सिस्टम की मांग विदेशों में तेजी से बढ़ी है।
सिंथेटिक बैरियर: नोएडा की कंपनियों द्वारा बनाए गए ये विशेष ‘बैरियर’ मिसाइल और ड्रोन हमले की ऊर्जा सोख लेते हैं। मात्र 600 रुपये की यह ‘सुरक्षा बोरी’ इजरायल और ईरान जैसे देशों में इमारतों को बचाने के लिए भेजी जा रही है।
बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट: यूपी के एमएसएमई (MSME) सेक्टर द्वारा निर्मित सुरक्षा गियर अब नाटो देशों की पहली पसंद बन रहे हैं।
ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचा रहा है ‘यूपी का इनोवेशन’
नोएडा स्थित फेरीटरो इंडिया और श्री हंस एनर्जी सिस्टम्स जैसी इकाइयां अब वैश्विक मानकों पर काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इजरायल संकट के बीच कम लागत वाले स्मार्ट हथियारों और सुरक्षा प्रणालियों के लिए यूपी एक बड़ा बाजार बनकर उभरा है।
डिफेंस कॉरिडोर से बदली तस्वीर
यूपी डिफेंस कॉरिडोर के तहत अलीगढ़, झांसी, कानपुर और लखनऊ जैसे नोड्स में निजी कंपनियों और डीआरडीओ (DRDO) की सक्रियता ने उत्पादन क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना दिया है। जर्मनी, कनाडा और अमेरिका जैसे बड़े देश अपना रक्षा बजट बढ़ा रहे हैं, जिसका सीधा फायदा यूपी के छोटे और मंझोले उद्योगों को मिल रहा है।
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