उत्तर प्रदेश

UP Panchayat Chunav: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले में हाईकोर्ट सख्त, आयोग से मांगी पंचायत चुनाव की तारीख

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने और प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। माननीय अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) को अगली सुनवाई पर सूबे में पंचायत चुनाव कराने की अंतिम तिथि स्पष्ट करने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के उस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट के लिए छह महीने का समय मांगा गया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश देते हुए पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़ी इस रिपोर्ट को आगामी 10 जुलाई तक हर हाल में अदालत के समक्ष पेश करने को कहा है।

कानून की मंशा के खिलाफ है प्रधानों को प्रशासक बनाना- याचिकाकर्ता

न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने बुधवार (3 जून, 2026) को यह महत्वपूर्ण आदेश ओमप्रकाश प्रजापति की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका (PIL) पर विस्तृत सुनवाई के बाद दिया।

गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों के प्रधानों का निर्धारित कार्यकाल पूरा हो गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने एक विशेष आदेश जारी करके निवर्तमान प्रधानों को ही उनकी संबंधित ग्राम पंचायतों में बतौर ‘प्रशासक’ नियुक्त कर दिया था, ताकि पंचायतों का काम प्रभावित न हो।

याचिका की दलील: याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने कोर्ट में दलील दी कि सरकार का यह आदेश पंचायती राज व्यवस्था और कानून की मूल मंशा के पूरी तरह खिलाफ है। कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हीं जनप्रतिनिधियों को पिछले दरवाजे से प्रशासनिक शक्तियां सौंपना लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन है।

6 महीने का वक्त मांगने वाली सरकार की दलील कोर्ट ने ठुकराई

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पंचायत चुनाव में सीटों के रोटेशन और आरक्षण की सही स्थिति निर्धारित करने के लिए एक समर्पित ‘पिछड़ा वर्ग आयोग’ का गठन किया गया है। सरकार का तर्क था कि यह आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करने में कम से कम छह महीने का समय लेगा और इस रिपोर्ट के आने के बाद ही प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं।

हाईकोर्ट की दोटूक: न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने सरकार की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि चुनाव को अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाला जा सकता। अदालत ने सरकार को पाबंद किया कि वह मामले की अगली सुनवाई की तारीख (10 जुलाई) को ही ओबीसी आयोग की रिपोर्ट टेबल पर रखे।

अब हाईकोर्ट के इस कड़े और सख्त रुख के बाद राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब आयोग को कोर्ट को बताना होगा कि वह यूपी में प्रधानी के चुनाव कब और कितने चरणों में संपन्न कराने जा रहा है।

Also Read: Azamgarh News: भोजपुरी के वैश्विक दूत अरविंद चित्रांश को ‘महाराणा प्रताप सेना-भारत’ ने ‘शौर्य सम्मान’ से नवाजा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button