यूपी स्मार्ट मीटर विवाद: जांच के लिए 4 सदस्यीय कमेटी गठित

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच पावर कॉरपोरेशन ने बड़ा कदम उठाते हुए चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह समिति 10 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर से जुड़ी समस्याओं जैसे रिचार्ज के बावजूद कनेक्शन में देरी, बैलेंस अपडेट में गड़बड़ी और तकनीकी खामियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। जांच के आधार पर ही प्रदेश में स्मार्ट मीटर की आगे की नीति तय की जाएगी।
विशेषज्ञों को शामिल कर बनाई गई कमेटी
पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल के निर्देश पर गठित इस समिति में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अंकुश शर्मा और प्रबोध बाजपेयी, तथा वडोदरा स्थित इलेक्ट्रिकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन के अनुभाग प्रमुख तेजस मिस्त्री शामिल हैं। पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वितरण) जीडी द्विवेदी को समिति का संयोजक बनाया गया है।
यह समिति स्मार्ट मीटरों के तकनीकी मानकों, उनकी कार्यक्षमता और उपभोक्ताओं की शिकायतों का विस्तृत विश्लेषण करेगी, ताकि समस्याओं की जड़ तक पहुंचा जा सके। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अब तक करीब 85 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 70 लाख प्रीपेड मोड पर संचालित हो रहे हैं। इनका उद्देश्य बिजली व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाना था।
उपभोक्ताओं की बढ़ती नाराजगी
उपभोक्ताओं का कहना है कि कई बार रिचार्ज करने के बाद भी बिजली कनेक्शन तुरंत सक्रिय नहीं होता। इसके अलावा बैलेंस अपडेट में देरी और बिलिंग संबंधी गड़बड़ियां भी सामने आ रही हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं के चलते बड़ी संख्या में उपभोक्ता स्मार्ट प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड मोड में बदलने के लिए आवेदन कर रहे हैं। विवाद का एक अहम पहलू यह भी है कि 1 अप्रैल को जारी अधिसूचना में प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर नए कनेक्शन अभी भी प्रीपेड मोड में दिए जा रहे हैं।
उपभोक्ता परिषद ने लगाई रोक की मांग
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मांग की है कि जब तक समिति की रिपोर्ट नहीं आती, तब तक नए स्मार्ट मीटर लगाने और पुराने मीटर बदलने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
पहले से जारी है आंशिक जांच, फिर भी शिकायतें बरकरार
पावर कॉरपोरेशन के अनुसार, पहले से ही 5% स्मार्ट मीटरों की जांच के लिए चेक मीटर लगाए जा रहे हैं, लेकिन शिकायतों में कमी नहीं आई। यही कारण है कि अब उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति से व्यापक जांच कराई जा रही है।
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