बिजनेस

Business News: सोने की कीमतों में भारी उथल-पुथल की क्या है बड़ी वजह? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुद खोल दिया राज

Lucknow Focus News Desk: भारतीय सर्राफा बाजार और शेयर बाजार में इन दिनों चल रही भारी उथल-पुथल के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का एक बड़ा बयान सामने आया है। पीटीआई (PTI) को दिए एक विशेष साक्षात्कार में वित्त मंत्री ने सोने (Gold) की आसमान छूती और फिर अचानक गिरती कीमतों से लेकर बजट 2026 के कड़े फैसलों पर सरकार का रुख पूरी तरह साफ किया है।

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सोने की कीमतों में जो तेज उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल रहा है, उसकी सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर बनी भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता है।

करेंसियों पर से डिगा निवेशकों का भरोसा, इसलिए सोने की तरफ भाग रहे लोग

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर हालात इस समय पूरी तरह साफ नहीं हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा किसी एक देश की करेंसी (मुद्रा) पर टिक नहीं पा रहा है।

“जब दुनिया भर के बाजारों में डर, असमंजस और मंदी का माहौल बनता है, तो लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखने के लिए ‘सेफ हेवन’ माने जाने वाले सोने (Gold) की ओर भागते हैं। लेकिन जब इसी बाजार में अनिश्चितता जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो सोने की कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। गोल्ड की कीमतों में यह अस्थिरता इस बात का सीधा संकेत है कि निवेशक फिलहाल किसी भी वैश्विक मुद्रा को पूरी तरह सुरक्षित नहीं मान रहे हैं।”

रिकॉर्ड स्तर से ₹23,000 की भारी गिरावट, निवेशकों में मची हलचल

घरेलू बाजार की बात करें तो सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जहां सोना 0.19 फीसदी टूटकर करीब ₹1,47,475 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा।

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों ने निवेशकों को चौंका दिया है:

5 दिन में 13% की बड़ी गिरावट: बीते महज पांच दिनों के भीतर सोने की कीमतों में 13 फीसदी से ज्यादा की भारी गिरावट आ चुकी है।

रिकॉर्ड स्तर से फिसला: इसी साल 29 जनवरी 2026 को सोना अपने ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड स्तर ₹1,70,480 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था। लेकिन अब यह वहां से करीब ₹23,000 फिसलकर ₹1,47,500 के आसपास आ गया है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट एक सुधारात्मक (Correction) कदम है जो ग्लोबल फैक्टर्स से प्रभावित है।

बजट 2026: लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स और निवेश को बढ़ावा देना प्राथमिकता

साक्षात्कार के दौरान केंद्रीय बजट को लेकर बात करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता देश में निवेश (Investment) को बढ़ावा देना है, ताकि भारत की आर्थिक विकास दर (GDP Growth) की रफ्तार मजबूती से बनी रहे।

उन्होंने बताया कि बजट में लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स (अधिक रोजगार देने वाले उद्योगों) पर खास ध्यान केंद्रित किया गया है, ताकि युवाओं के लिए रोजगार के नए मौके पैदा हों। सरकार ने ‘विकसित भारत’ के बड़े लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स (संरचनात्मक सुधार), फिस्कल अनुशासन (राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण) और मौद्रिक स्थिरता के साथ-साथ पब्लिक इनवेस्टमेंट को बहुत मजबूत रखा है।

Also Read: एलएनजी के बाद बिजली क्षेत्र में अडानी का महा-दांव, 3050 करोड़ में खरीदी ‘इंटेलीस्मार्ट’, यूपी के करोड़ों घरों में लगेंगे स्मार्ट प्रीपेड मीटर

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button