राष्ट्रगान की तरह ‘वंदे मातरम’ के लिए भी बनेंगे नियम, केंद्र सरकार तैयार कर रही है नया प्रोटोकॉल

Lucknow Focus News Desk: केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को वही दर्जा और सम्मान दिलाने की तैयारी में है, जो राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को प्राप्त है। जल्द ही आपको वंदे मातरम गाए जाने के दौरान भी राष्ट्रगान की तरह सावधान की मुद्रा में खड़े होने और इसके सम्मान के कड़े नियम देखने को मिल सकते हैं।
क्यों पड़ रही है नियमों की जरूरत?
वर्तमान में हमारे संविधान में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों को समान दर्जा तो प्राप्त है, लेकिन कानूनी तौर पर दोनों में एक बड़ा अंतर है। इसके गायन के दौरान खड़ा होना अनिवार्य है। यदि कोई राष्ट्रगान का अपमान करता है, तो उसे ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम-1971’ के तहत सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ता है।
‘वंदे मातरम’ के लिए अभी तक ऐसा कोई लिखित नियम या दंडात्मक प्रावधान नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए गृह मंत्रालय एक औपचारिक प्रोटोकॉल तैयार कर रहा है।
गृह मंत्रालय की बैठक में अहम चर्चा
एक हालिया उच्च-स्तरीय बैठक में गृह मंत्रालय ने इन प्रमुख बिंदुओं पर मंथन किया।
क्या वंदे मातरम गाने के समय, स्थान और तरीके के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए?
क्या इसके गायन के दौरान राष्ट्रगान की तरह खड़ा होना कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए?
क्या राष्ट्रीय गीत का अपमान करने वालों पर जुर्माना या कानूनी कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए?
सियासी सरगर्मी और ऐतिहासिक संदर्भ
यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब सरकार ‘वंदे मातरम’ का साल भर चलने वाला उत्सव मना रही है। इसे लेकर राजनीतिक बहस भी छिड़ गई है। पार्टी का आरोप है कि आजादी के समय कांग्रेस ने तुष्टिकरण के चलते वंदे मातरम के महत्व को कम किया। बीजेपी के अनुसार, 1937 के कांग्रेस अधिवेशन में गीत के कुछ छंदों को हटाना विभाजन की नींव रखने जैसा था।
कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है और आगामी चुनावों (जैसे पश्चिम बंगाल) को देखते हुए इस मुद्दे को तूल दे रही है।
आंदोलन की गूंज से संवैधानिक सम्मान तक
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित ‘वंदे मातरम’ 1905 के स्वदेशी आंदोलन के दौरान आजादी का सबसे बड़ा नारा बना था। साल 2022 में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में माना था कि फिलहाल इसके लिए कोई दंडात्मक नियम नहीं हैं, लेकिन अब सरकार इसे कानूनी रूप से राष्ट्रगान के समकक्ष सम्मान दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रही है।

