उत्तर प्रदेशलखनऊ

पैर छुए, आशीर्वाद लिया… फिर भी खाली हाथ रहे आकाश आनंद, यूपी की राजनीति पर मायावती का ‘मौन’ बरकरार

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर इस समय अंदरूनी हलचलें तेज हैं। हाल ही में लखनऊ में आयोजित हुई बसपा की राष्ट्रीय समीक्षा बैठक में सबकी नजरें पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद पर टिकी थीं। आकाश आनंद अपने पिता आनंद कुमार के साथ इस हाई-प्रोफाइल बैठक में शामिल होने पहुंचे। उन्होंने मंच पर बसपा सुप्रीमो मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया, लेकिन इसके बावजूद उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी तत्काल वापसी को लेकर सस्पेंस बरकरार है।

बैठक में उत्तर प्रदेश और आगामी चुनावों को लेकर आकाश आनंद की भूमिका पर मायावती ने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी। इससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि बसपा फिलहाल आकाश को यूपी की मुख्य कमान या कोई बड़ी जिम्मेदारी देने के मूड में नहीं दिख रही है।

चुनावी हार के बाद भी आकाश को यूपी से दूरी, संगठन में उठने लगी मांग

हाल ही में पांच राज्यों (तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल आदि) में हुए विधानसभा चुनावों में बसपा का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, जहां पार्टी का वोट बैंक घटकर करीब आधा रह गया है। इन राज्यों की कमान पार्टी के पुराने और वरिष्ठ नेताओं के हाथ में थी, जबकि आकाश आनंद को केवल कुछ चुनिंदा जनसभाएं करने के लिए भेजा गया था।

इस करारी हार के बाद अब बसपा के भीतर बड़े बदलाव और युवाओं को आगे लाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना है कि मायावती अब पहले की तरह सघन चुनावी दौरे नहीं करती हैं। ऐसे में यूपी चुनाव की पूरी जिम्मेदारी आकाश आनंद और उनके साथ जुड़े युवाओं की सक्रिय टीम को सौंप देनी चाहिए, जो जमीन पर माहौल बना सके।

प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल भले ही लगातार एक्टिव हैं, लेकिन ग्राउंड लेवल पर अन्य पदाधिकारियों की उदासीनता पार्टी को भारी पड़ रही है। ऐसे में कैडर को पुनर्जीवित करने के लिए आकाश आनंद का चेहरा जरूरी माना जा रहा है।

देशभर में संगठन विस्तार का जिम्मा, लेकिन यूपी-उत्तराखंड पर सस्पेंस

बसपा सुप्रीमो ने आकाश आनंद को देश भर में संगठन के विस्तार की जिम्मेदारी तो दे रखी है, लेकिन पार्टी का असली जनाधार उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में ही सिमटा है। जानकारों का कहना है कि आकाश की असली सियासी सफलता तभी मुमकिन है जब उन्हें यूपी जैसे गढ़ की कमान मिले।

इसके बावजूद, समीक्षा बैठक में मायावती ने यूपी चुनाव में आकाश की सक्रिय भूमिका या उनके आगामी चुनाव प्रचार अभियान पर कोई बात नहीं की। मई में प्रस्तावित आकाश के चुनावी दौरों के आगाज का फैसला भी मायावती को ही करना था, लेकिन इस पर भी उन्होंने मौन साधे रखा, जिससे कयासों का बाजार गर्म है।

बसपा दफ्तर के बाहर लगी होर्डिंग बनी चर्चा का विषय

समीक्षा बैठक के दौरान बसपा के प्रदेश कार्यालय के बाहर लगी एक होर्डिंग राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा का विषय बनी रही। इस होर्डिंग पर मायावती का एक पुराना और कड़ा संदेश लिखा था, जिसे मौजूदा राजनीतिक हालातों से जोड़कर देखा जा रहा है “जिस समाज का इतिहास नहीं होता है, वह समाज कभी शासक नहीं बन पाता है। इतिहास से प्रेरणा मिलती है, प्रेरणा से जागृति आती है, जागृति से सोच बनती है, सोच से ताकत बनती है, ताकत से शक्ति बनती है और शक्ति से शासक बनता है।”

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