बहराइच: जंगलों के खौफ से आजाद हुए 136 परिवार, सीएम योगी ने 500 लोगों को सौंपा ‘सम्मान का नया घर’

Lucknow Focus News Desk: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को जनपद बहराइच के मिहींपुरवा स्थित सेमरहना में एक ऐतिहासिक मानवीय पहल की। दशकों से कतर्नियाघाट के जंगलों और नदियों के बीच असुरक्षित जीवन जी रहे भरथापुर गांव के 136 परिवारों (500 लोगों) को मुख्यमंत्री ने न केवल सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किया, बल्कि उन्हें पक्के आवास, सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का तोहफा भी दिया।
खतरे के साये में कट रही थी जिंदगी
मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि कौडियाला सरयू नदी हादसे के बाद जब उन्होंने गांव की स्थिति देखी, तो वह हैरान रह गए। एक ओर बाघ, हाथी और तेंदुए का डर था, तो दूसरी ओर नदी में मगरमच्छों और सांपों का खतरा। आखिर इन परिवारों का दोष क्या था कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी इनके पास न सड़क थी, न बिजली और न ही सिर पर पक्की छत?
जाति का चश्मा उतारकर ‘संवेदना’ से सेवा
सपा के ‘PDA’ और पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए सीएम योगी ने कहा कि डबल इंजन की सरकार जाति या संप्रदाय के आधार पर नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना के आधार पर काम करती है।
इन 500 लोगों में दलित, पिछड़े, मौर्य-कुशवाहा और जनजातीय सभी वर्गों के लोग शामिल हैं। सीएम ने एक क्लिक के जरिए 1 करोड़ 63 लाख 30 हजार रुपये की धनराशि सीधे ग्रामीणों के खातों में ट्रांसफर की। कुल मिलाकर विस्थापन और सुविधाओं पर 21 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
अब वन ग्रामों की बदलेगी सूरत
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कतर्नियाघाट जंगल के पांच वन ग्रामों— टेड़िया, ढकिया, गोकुलपुर, बिछिया और भवानीपुर को अब ‘राजस्व ग्राम’ का दर्जा दे दिया गया है। इसका अर्थ है कि अब इन गांवों में भी सरकारी योजनाओं का लाभ, पक्की सड़कें और स्कूल-अस्पताल जैसी सुविधाएं पहुंच सकेंगी।
रोजगार और आत्मनिर्भरता पर जोर
सीएम ने स्पष्ट किया कि यह केवल विस्थापन नहीं है, बल्कि इन परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की शुरुआत है। सरकार इन लोगों को सुरक्षित आवास देने के साथ-साथ रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी प्रदान करेगी, ताकि इनका भविष्य उज्ज्वल हो सके।




