उत्तर प्रदेशलखनऊ

मायावती का कांग्रेस-सपा पर बड़ा हमला, बोलीं-‘महिला आरक्षण पर गिरगिट की तरह रंग बदल रहे दल

Lucknow Focus News Desk: महिला आरक्षण (नारीशक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने दोनों दलों को ‘छलावा’ और ‘दोहरा चरित्र’ रखने वाली पार्टी बताते हुए दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को इनसे सावधान रहने की सलाह दी है।

‘कांग्रेस ने कभी पूरा नहीं किया आरक्षण का कोटा’

मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा संविधानिक अधिकारों के मामले में कांग्रेस गिरगिट की तरह रंग बदल रही है। जब केंद्र में इनकी सरकार थी, तब इन्होंने कभी एससी-एसटी और ओबीसी का आरक्षण कोटा पूरा नहीं किया। मायावती ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने ओबीसी समाज के लिए मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू नहीं की थी। इसे बाद में बसपा के प्रयासों से वीपी सिंह की सरकार में लागू कराया गया।

‘ठंडे बस्ते में डाली थी मुस्लिमों की रिपोर्ट’

सपा के ‘कोटे में कोटा’ की मांग पर तंज कसते हुए मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी जब सत्ता में होती है तो उनका रवैया संकीर्ण और जातिवादी रहता है। जुलाई 1994 में पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आई थी, जिसमें पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का लाभ देने की सिफारिश थी। सपा सरकार ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था, जिसे जून 1995 में बसपा सरकार बनते ही तुरंत लागू किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि आज सपा अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए महिलाओं के अलग आरक्षण की बात कर रही है, जबकि सत्ता में रहते हुए उन्होंने हमेशा इन वर्गों का तिरस्कार किया।

2011 की जनगणना और परिसीमन पर रुख

परिसीमन को लेकर मचे शोर पर मायावती ने व्यावहारिक रुख अपनाते हुए कहा यदि महिला आरक्षण को जल्दी लागू करना है, तो पिछली (2011) जनगणना के आधार पर परिसीमन स्वीकार कर लेना चाहिए। अगर आज कांग्रेस भी सत्ता में होती, तो वह भी भाजपा की तरह यही कदम उठाती।

दलित-पिछड़ों को सलाह: ‘जो मिल रहा है, स्वीकार करें’

बसपा सुप्रीमो ने अपने समर्थकों और सुरक्षित वर्गों की महिलाओं को सलाह दी कि फिलहाल जो अधिकार मिल रहे हैं, उन्हें स्वीकार कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज के वास्तविक हित के लिए कोई भी पार्टी गंभीर नहीं है, इसलिए किसी के बहकावे में न आएं और खुद को आत्मनिर्भर बनाएं।

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