UP में ‘शोर’ मचाने वालों की खैर नहीं, प्रेशर हॉर्न और मॉडिफाइड साइलेंसर पर सख्त SOP जारी

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर बेवजह हॉर्न बजाने और मॉडिफाइड साइलेंसर के जरिए शोर मचाने वालों के खिलाफ योगी सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। यातायात निदेशालय ने अदालत के आदेशों के अनुपालन में एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है, जिसके तहत अब न सिर्फ भारी जुर्माना लगेगा, बल्कि जेल जाने की नौबत भी आ सकती है।
दुकानदारों और गैराज मालिकों पर भी होगी FIR
नई SOP की सबसे बड़ी मार उन लोगों पर पड़ेगी जो अवैध हूटर और प्रेशर हॉर्न बेचते या लगाते हैं।
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नियमित निरीक्षण: पुलिस, ट्रैफिक, परिवहन और SGST विभाग की टीमें अब दुकानों, गैराज और वर्कशॉप का नियमित निरीक्षण करेंगी।
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FIR और ब्लैकलिस्ट: नियमों का उल्लंघन कर प्रेशर हॉर्न लगाने वाले दुकानदारों पर सीधे FIR दर्ज होगी और उनकी सूची थाने व यातायात कार्यालय में रखी जाएगी।
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पंजीकरण निलंबन: अवैध हूटर या हॉर्न पाए जाने पर संबंधित वाहन का रजिस्ट्रेशन (RC) निलंबित करने का भी निर्देश दिया गया है।
विदेशी वाहन भी आएंगे दायरे में
अक्सर देखा जाता है कि कई लग्जरी विदेशी स्पोर्ट्स कारें और बाइक्स स्वाभाविक रूप से 80 डेसिबल से अधिक शोर करती हैं। नई SOP में स्पष्ट किया गया है कि इन विदेशी वाहनों को भी भारतीय मानकों के अनुरूप मानकीकृत करना अनिवार्य होगा।
साइलेंस जोन में हॉर्न बजाया तो खैर नहीं
प्रशासन अब अस्पताल, न्यायालय और स्कूलों के आसपास के क्षेत्रों को सख्ती से ‘साइलेंस जोन’ घोषित कर वहां बोर्ड लगाएगा।
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साइलेंस जोन या व्यस्त चौराहों पर बेवजह हॉर्न बजाने पर मोटरयान अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होगी।
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प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र (PUC) के साथ अब वाहन में प्रेशर हॉर्न और हूटर की स्थिति भी दर्ज की जाएगी।
शिकायत के लिए आएगा विशेष मोबाइल ऐप
जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार एक मोबाइल ऐप विकसित कर रही है। इस ऐप पर आम नागरिक ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के फोटो और वीडियो अपलोड कर सकेंगे, जिसके आधार पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
सजा और जुर्माने का नया स्लैब
| अपराध | प्रथम बार (सजा/जुर्माना) | दोबारा अपराध (सजा/जुर्माना) |
| प्रेशर हॉर्न/मॉडिफाइड साइलेंसर | 3 माह जेल या ₹10,000 जुर्माना (या दोनों) | 6 माह जेल या ₹10,000 जुर्माना (या दोनों) |
| अनावश्यक हॉर्न बजाना | ₹1,000 जुर्माना | ₹2,000 जुर्माना |
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