Women Reservation Bill: भाजपा का ‘मास्टर स्ट्रोक’ या विपक्ष के लिए जाल? ‘नारी शक्ति’ के सहारे 2027 की तैयारी में जुटी बीजेपी

Lucknow Focus News Desk: महिला आरक्षण विधेयक को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे एक बड़े वोटबैंक में तब्दील करने की मुकम्मल तैयारी कर ली है। संसद में विधेयक के गिरने के बाद, अब भाजपा इसे विपक्ष की ‘महिला विरोधी’ मानसिकता के रूप में पेश कर जनता के बीच जाने वाली है। उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक, भाजपा की भविष्य की राजनीति अब महिला अस्मिता और कल्याण के इर्द-गिर्द सिमटती दिख रही है।
भाजपा ने आगामी चुनावों और विपक्ष को घेरने के लिए आक्रामक स्लोगन तैयार किए हैं। पार्टी ने नारा दिया है सियासत तुम करो, फैसले नारी शक्ति करेगी। भाजपा रणनीतिकारों ने विपक्ष को 2024 के लोकसभा चुनाव में हुए 65.8% महिला मतदान की याद दिलाते हुए चेतावनी दी है कि अब महिलाएं न केवल वोट देंगी, बल्कि विरोध करने वालों का हिसाब भी करेंगी।
कल्याणकारी योजनाओं से बनाया ‘साइलेंट वोटबैंक’
केंद्र और यूपी की सत्ता में आने के बाद से ही भाजपा ने अपनी योजनाओं के केंद्र में महिलाओं को रखा है। राशन कार्ड से लेकर प्रधानमंत्री आवास योजना के घरों तक में महिलाओं को घर का मुखिया बनाया गया। उज्ज्वला योजना, लखपति दीदी और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचाया गया। यही कारण है कि हालिया विधानसभा चुनावों में महिलाएं ‘किंग मेकर’ बनकर उभरीं और उन्होंने भाजपा को अपनी पहली पसंद बनाया।
तीन राज्यों के नतीजों का इंतजार
भाजपा के रणनीतिक तरकश में अभी कई तीर बाकी हैं। पार्टी फिलहाल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के विधानसभा चुनाव नतीजों का इंतजार कर रही है। इन नतीजों के बाद देश भर में ‘जनाक्रोश रैलियां’ और प्रेस वार्ताओं के जरिए विपक्ष की कड़ी घेराबंदी करने की योजना है।
चुनाव आयोग और एसबीआई (SBI) रिसर्च के हालिया आंकड़े बताते हैं कि मतदान में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की मुख्य वजह महिला कल्याण की योजनाएं हैं। भाजपा ने राजनीति में महिला अस्मिता को एक ऐसा ‘अहम फैक्टर’ बना दिया है, जिसने विपक्ष के जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को कड़ी चुनौती दी है।




