वायु प्रदूषण से बढ़ रहा है लेवी बॉडी डिमेंशिया का खतरा, दिमाग पर हो रहा है सीधा असर

Lucknow Focus News Desk : अगर आप सोचते हैं कि वायु प्रदूषण सिर्फ साँस की बीमारियों का कारण बनता है, तो आप गलत हैं। एक नई रिसर्च में चेतावनी दी गई है कि हवा में मौजूद प्रदूषण के महीन कण, खासकर PM2.5, आपके दिमाग को भी गंभीर नुकसान पहुँचा रहे हैं। ये कण न सिर्फ फेफड़ों को, बल्कि मस्तिष्क तक पहुँचकर लेवी बॉडी डिमेंशिया जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा बढ़ा रहे हैं।
अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. शियाओबो माओ ने बताया कि प्रदूषण के सूक्ष्म कण हमारे शरीर की सुरक्षा प्रणाली को भेदकर खून के रास्ते दिमाग तक पहुँच सकते हैं।
एक बार दिमाग में पहुँचने पर, ये कण तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन्स) को नष्ट कर देते हैं। इस वजह से दिमाग में प्रोटीन के गुच्छे बनने लगते हैं, जिन्हें ‘लेवी बॉडी’ कहा जाता है।
क्यों खतरनाक हैं ये कण?
लेवी बॉडी प्रोटीन के असामान्य जमाव होते हैं, जो अल्फा-सिन्यूक्लिन नामक प्रोटीन से बनते हैं। यह प्रोटीन वैसे तो दिमाग के लिए जरूरी होता है, लेकिन प्रदूषण के संपर्क में आने पर यह गलत तरीके से मुड़कर हानिकारक रूप ले लेता है। ये लेवी बॉडी धीरे-धीरे दिमाग में फैलकर तंत्रिका कोशिकाओं को मार देती हैं, जिससे याददाश्त कमजोर होने लगती है।
शोध में क्या सामने आया?
वैज्ञानिकों ने चूहों पर एक प्रयोग किया। उन्होंने चूहों के एक समूह को 10 महीनों तक हर दूसरे दिन PM2.5 प्रदूषण के संपर्क में रखा। परिणाम चौंकाने वाले थे: सामान्य चूहों में तंत्रिका कोशिकाएं मर गईं, जिससे उनका मस्तिष्क सिकुड़ने लगा।
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इस बीमारी का खतरा उन लोगों में ज़्यादा है जो शहरों में रहते हैं, क्योंकि यहाँ गाड़ियों से निकलने वाले धुएँ में ये कण बहुत ज़्यादा होते हैं।
वैज्ञानिकों का साफ कहना है कि स्वच्छ हवा ही मस्तिष्क के स्वास्थ्य की गारंटी है। प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा, क्योंकि यह सिर्फ एक पर्यावरणीय नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या भी है।




