लखनऊ: ‘जेपी वाहिनी’ ने किया गोष्ठी का आयोजन; डिप्टी सीएम बोले- जेपी के संघर्ष के कारण लगा था आपातकाल

Lucknow Focus News Desk: लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) की जयंती के अवसर पर शनिवार को उमानाथ बली प्रेक्षागृह, भातखंडे विश्वविद्यालय में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जेपी वाहिनी के अध्यक्ष एवं क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी (भाजपा) के.सी. जैन एडवोकेट द्वारा ‘लोक नायक जय प्रकाश नारायण: भारत छोड़ो आंदोलन से लेकर सम्पूर्ण क्रांति तक’ विषय पर किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा जयप्रकाश नारायण की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।
मुख्य अतिथि: उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक
गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने जेपी के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज से 50 वर्ष पहले देश में आपातकाल की घोषणा इसलिए की गई थी, क्योंकि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में जनता ने इंदिरा गांधी के भ्रष्टाचार-युक्त शासन के खिलाफ विद्रोह कर दिया था।
उन्होंने कहा कि 1975 में आपातकाल के दौरान सभी विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। पाठक ने बताया कि इंदिरा गांधी ने जेपी को राष्ट्रपति बनाने का लालच भी दिया था, लेकिन वह किसी लालच में नहीं आए और हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े रहे।
अन्य मंत्रियों और विशिष्ट अतिथियों के विचार
मंत्री दयाशंकर सिंह (अति विशिष्ट अतिथि): उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत देश भ्रष्टाचार मुक्त महाशक्ति बनकर उभर रहा है। उन्होंने सफलतापूर्वक कार्यक्रम के आयोजन के लिए जेपी वाहिनी के अध्यक्ष के.सी. जैन को बधाई दी।
एससी/एसटी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत ने कहा कि बिहार के सामान्य परिवार में जन्मे जयप्रकाश नारायण ने देश के प्रति अपने समर्पण से खुद को एक महानायक के रूप में स्थापित किया।
मंत्री दानिश आजाद ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की सरकारें बिना किसी जाति या धर्म के भेदभाव के, सबके लिए काम कर रही हैं।
मुख्य वक्ता बृजेंद्र पाल सिंह (लोक भारती) ने कहा कि जेपी ने न केवल आजादी की लड़ाई लड़ी, बल्कि आजादी के बाद सत्ता के एक परिवार विशेष के हाथ में केंद्रित होने के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी, जिसके कारण उन्हें आपातकाल के दौरान लगभग ढाई साल जेल में रहना पड़ा।
के.सी. जैन ने युवाओं को प्रेरित किया
जेपी वाहिनी के अध्यक्ष के.सी. जैन एडवोकेट ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने कभी भी सत्ता नहीं चाही। उन्होंने नेहरू द्वारा दिए गए मंत्री पद को भी अस्वीकार कर दिया था। उन्होंने बताया कि 1975 में इंदिरा गांधी संपूर्ण क्रांति आंदोलन से इतना डर गईं कि उन्होंने आपातकाल लगा दिया, लेकिन जनता के विद्रोह के कारण 1977 में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। जैन ने कहा कि जेपी चाहते तो प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन वह कभी सत्ता लोलुप नहीं रहे और युवाओं को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।
भाषण प्रतियोगिता और सम्मान समारोह
इस अवसर पर, गोष्ठी के विषय “लोक नायक जय प्रकाश नारायण: भारत छोड़ो आंदोलन से लेकर सम्पूर्ण क्रांति तक” पर एक भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय और महाविद्यालय की 50 से अधिक छात्राओं ने भाग लिया।
सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, गौ सेवा, समाज सेवा और जीव दया के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 40 से अधिक लोगों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में एमएलसी पवन सिंह, एमएलसी अवनीश सिंह, एमएलसी रामचंद्र प्रधान, भाजपा प्रवक्ता हरीश श्रीवास्तव, अपर महाधिवक्ता (हाईकोर्ट लखनऊ) कुलदीप पति त्रिपाठी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।




