उत्तर प्रदेश

जयपुरिया इंस्टीट्यूट में शिक्षकों की एक दिवसीय कार्यशाला, ‘बाल-केंद्रित’ और ‘आनंददायी’ शिक्षण पर दिया गया विशेष जोर

Lucknow Focus News Desk: जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, गोमती नगर (लखनऊ) की सामाजिक दायित्व (SRC) समिति की चेयरपर्सन डॉ. रीना अग्रवाल के निर्देशन में बाराबंकी जनपद के चार प्रमुख विद्यालयों के शिक्षकों के लिए एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला (Orientation Workshop) का सफल आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का संयोजन ‘बेसिक उत्थान एवं ग्रामीण सेवा संस्थान’ द्वारा किया गया, जिसमें लगभग 50 शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित कुल 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला के दो मुख्य वैचारिक सत्र

शिक्षकों की कार्यक्षमता और शिक्षण पद्धति को आधुनिक बनाने के लिए कार्यशाला को दो तकनीकी सत्रों में विभाजित किया गया था।

1. प्रथम सत्र: आधुनिक कंप्यूटर तकनीक और व्यावहारिक ज्ञान

एसआरसी (SRC) के समन्वयक सौरभ तथा प्रबंधन के छात्रों की टीम ने शिक्षकों को डिजिटल दौर की उपयोगी शिक्षण विधियों से परिचित कराया, जिसके तहत निम्नलिखित व्यावहारिक जानकारियां दी गईं।

  • कंप्यूटर हार्डवेयर की मूलभूत समझ और संचालन।

  • प्रभावी शिक्षण के लिए पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन (PPT) तैयार करना।

  • आधिकारिक संवाद के लिए ई-मेल (E-mail) का सही उपयोग।

  • एम.एस. पेंट (MS Paint) का शिक्षण में रचनात्मक उपयोग।

  • कंप्यूटर आधारित परीक्षा परिणाम (डिजिटल रिजल्ट शीट) तैयार करना।

2. द्वितीय सत्र: बाल-केंद्रित एवं आनंददायी शिक्षण पद्धति

संस्थान की चेयरपर्सन डॉ. रीना अग्रवाल ने शिक्षकों का मार्गदर्शन करते हुए कक्षा के माहौल को बच्चों के अनुकूल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए।

  • कक्षा की शुरुआत: कक्षा का प्रारंभ सदैव प्रार्थना और ‘आइस ब्रेकिंग’ (घुलने-मिलने वाली) गतिविधियों से होना चाहिए, ताकि बच्चों में सीखने के प्रति उत्साह पैदा हो।

  • सकारात्मक संवाद: शिक्षक बच्चों की कमियों को उजागर करने के बजाय उनकी छोटी-छोटी उपलब्धियों और सकारात्मक व्यवहार को अभिभावकों के साथ साझा करें। बच्चों को ग्रीटिंग कार्ड या प्रशंसा पत्र देकर प्रोत्साहित करें।

  • धीमी गति से सीखने वाले बच्चों पर ध्यान: ऐसे बच्चों की सीखने की क्षमता को निरंतर प्रशंसा, प्रोत्साहन और व्यक्तिगत सहयोग से सुधारा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर ‘स्पेशल एजुकेटर’ की मदद भी ली जानी चाहिए।

  • अभिभावकों से जुड़ाव: यदि कोई छात्र लगातार अनुपस्थित रहता है, तो शिक्षक को स्वयं अभिभावक से संपर्क कर कारण जानने और समस्या का समाधान करने का प्रयास करना चाहिए।

सर्वांगीण विकास के लिए प्रमुख व्यावहारिक सुझाव

डॉ. अग्रवाल ने विद्यालयी जीवन को और अधिक रचनात्मक बनाने के लिए निम्नलिखित सुझावों पर बल दिया।

  • प्रतियोगिताएं: प्रत्येक कक्षा की शुरुआत एक संक्षिप्त क्विज (प्रश्नोत्तरी) के माध्यम से की जाए।

  • मंच का अवसर: विद्यालय में प्रत्येक विद्यार्थी को मंच पर आकर अपनी बात रखने या प्रस्तुति देने का समान अवसर मिलना चाहिए।

  • सह-पाठ्यचर्या गतिविधियां: सप्ताह में कम से कम एक दिन शिक्षणेत्तर गतिविधियों (Co-curricular activities) और इनडोर/आउटडोर खेलों का आयोजन हो, जिसमें शिक्षकों की भी सक्रिय सहभागिता हो।

  • सामाजिक सरोकार: विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए पौधारोपण जैसे अभियानों से जोड़ा जाए।

इन 4 प्रमुख विद्यालयों के शिक्षकों ने की सहभागिता

इस कार्यशाला में बाराबंकी के निम्नलिखित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया।

  1. चाइल्ड फ्रेंडली स्कूल, ग्राम छंदवल

  2. आनंद विहार कॉन्वेंट इंटर कॉलेज, लखपेड़ाबाग

  3. आनंद विहार कॉन्वेंट इंटर कॉलेज, मसौली शाखा

  4. रामदीन कलावती शिक्षण संस्थान, सनौली

प्रमुख उपस्थित हस्तियां

कार्यशाला के समापन सत्र में शिक्षकों की जिज्ञासाओं और दैनिक शिक्षण में आने वाली चुनौतियों का समाधान किया गया। इस अवसर पर चाइल्ड फ्रेंडली स्कूल के प्रबंधक रत्नेश कुमार, आनंद विहार कॉन्वेंट के प्रबंधक शैलेंद्र सिंह, रामदीन कलावती संस्थान के राजेश रावत, प्रधानाचार्य विनोद कुमार, अंशिका मिश्रा सहित एसआरसी टीम के सदस्य उपस्थित रहे।

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