UP: आयुष्मान आरोग्य शिविरों से टीबी पर ‘प्रहार’, 2.6 लाख संभावित मरीजों की पहचान, अब हाई रिस्क गांवों पर फोकस

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के संकल्प के साथ योगी सरकार का अभियान अब और तेज हो गया है। ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान के तहत आयुष्मान आरोग्य शिविर मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। प्रदेश में अब तक आयोजित 2695 शिविरों के माध्यम से दो लाख से अधिक संभावित टीबी मरीजों की पहचान की गई है। इस सफलता को देखते हुए अब विशेष रूप से उच्च जोखिम (High Risk) वाले गांवों में प्राथमिकता के आधार पर इन शिविरों का आयोजन किया जाएगा।
100 दिवसीय विशेष अभियान और ‘टीबी फ्री पंचायत’
राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना ने बताया कि प्रदेश में “टीबी फ्री पंचायत” पहल के उत्साहजनक परिणाम मिल रहे हैं।
पंचायतों की उपलब्धि: वर्ष 2024 में 7,191 टीबी मुक्त पंचायतों की संख्या बढ़कर 2025 में 7,577 हो गई है।
सम्मान: उत्कृष्ट कार्य के लिए 227 पंचायतों को गोल्ड, 1,934 को सिल्वर और 5,416 पंचायतों को ब्रॉन्ज मेडल से नवाजा गया है।
विशेष रणनीति: विश्व टीबी दिवस (24 मार्च) से शुरू हुए 100 दिवसीय विशेष अभियान के तहत महिलाओं और सामाजिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और एक्स-रे सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को निम्नलिखित लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
दो सप्ताह से अधिक खांसी या बलगम में खून आना।
लगातार बुखार, वजन का कम होना और भूख न लगना।
रात में पसीना आना, सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ।
आयुष्मान आरोग्य शिविर के मुख्य फोकस बिंदु
सरकार ने इन शिविरों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
को-मोर्बिडिटी जांच: शुगर, बीपी और कुपोषण से ग्रसित व्यक्तियों की अनिवार्य जांच।
सघन स्क्रीनिंग: हाई रिस्क श्रेणी वाले लोगों की बिना लक्षण के भी संभावित जांच और एक्स-रे।
पोषण सहायता: टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) और मरीजों को पोषण संबंधी सहायता सुनिश्चित करना।
जनभागीदारी: सांसद, विधायक से लेकर ग्राम प्रधानों तक को अभियान से जोड़ना।
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