विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर बाराबंकी में जागरूकता गोष्ठी, पर्यावरण बचाने का संकल्प

Lucknow Focus News Desk: बाराबंकी में विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर चेतना क्षेत्र स्तरीय समिति के तत्वावधान में विकास भवन में एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में समाजसेवी रत्नेश कुमार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण जल स्रोतों का संरक्षण भी है। उन्होंने कहा कि खेती के लिए खेत और पानी के लिए तालाब बचाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन को रोकने और प्रकृति को बचाने की आस्था के साथ आगे आने का आह्वान किया।
जल संरक्षण और प्रकृति बचाने का संदेश
कार्यक्रम की अध्यक्षता वारिश चिल्ड्रेन एकेडमी की प्रधानाचार्य कमलेश शुक्ला ने की। उन्होंने जल संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए अपनी पंक्तियां प्रस्तुत कीं –
“हरी भरी धरती हो मेरी यह अभियान चलाएं,
जल का दोहन मत कर प्यारे यह सबको बतलाएं।”
कार्यक्रम का संचालन व्यंग्यकार अनिल श्रीवास्तव “लल्लू” ने किया। उन्होंने वनों की कटाई, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से पैदा हो रहे संकटों पर चिंता जताई और प्रकृति संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
कवियों और साहित्यकारों का योगदान
कार्यक्रम में कई साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। ओज कवि डॉ. ओ.पी. वर्मा “ओम” ने खेतों की मेड़, नाले और चकरोड की सुरक्षा पर बल दिया, वहीं कवि दीपक दिवाकर ने कहा – “धरती से कट गए बाग वन वाटिका तो, प्राणवायु धरती पर नहीं रह पाएगी।”
वरिष्ठ कवि सियाराम रावत “ठहाकाश्री” ने हास्य-व्यंग्य शैली में प्रकृति बचाने का संदेश दिया – “अधिकाधिक पौध रोपित कर पर्यावरण बचाना है, प्रकृति संरक्षित करना हमको संकल्पित हो जाना है।”
युवा गीतकार साहब नारायण शर्मा ने शहरीकरण पर कटाक्ष करते हुए कहा – “पृथ्वी तबाह करके अब इंसान यहां से, चांद और मंगल पर ठिकाना ढूंढ रहे हैं।”
कवयित्री लता श्रीवास्तव ने पंक्तियां प्रस्तुत कीं – “इस धरती पर हम सब मिलकर पौध लगाएंगे, प्राणवायु देकर हम सबकी जान बचाएंगे।” वहीं, कवियत्री किरन भारद्वाज ने प्राकृतिक आपदाओं पर चिंता जताते हुए कहा “सोचो यह और समझो यह, प्रकृति है क्यों रूठ रही, विपदा हम पर टूट रही।”
सम्मान और समापन
समिति की अध्यक्ष आशा सिंह ने प्रकृति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा – “कट रहे जंगल सारे, उजड़ रहा जीवन का बसेरा, पर्वतों को तोड़ते बुलडोजर, सिकुड़ रहा नदियों का किनारा।”

इस अवसर पर साहित्यकार सियाराम रावत “ठहाकाश्री”, आशा सिंह और स्काउट गाइड राज्य पुरस्कार प्राप्त छात्रा प्रतिभा सिंह को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में आशा सिंह ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।
Also Read: श्री कल्कि जयंती पर ऐंचोड़ा कंबोह गांव में भव्य आयोजन, डिप्टी सीएम बृजेश पाठक रहेंगे मुख्य अतिथि




