‘जल्द अंतरिक्ष में होगा भारत का अपना स्पेस स्टेशन’, इसरो प्रमुख डॉ. वी. नारायणन का बड़ा ऐलान

Lucknow Focus News Desk: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बीते सोमवार को लखनऊ में एक अहम घोषणा करते हुए कहा कि भारत निकट भविष्य में अपना खुद का स्पेस स्टेशन स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से काम कर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इसरो ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है जिससे बिजली गिरने से पहले उसकी सटीक चेतावनी दी जा सकेगी।
डॉ. नारायणन राजधानी स्थित रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (RSAC) में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। यह कार्यक्रम योजना भवन के सभागार में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा अंतरिक्ष विज्ञान का उद्देश्य केवल तकनीकी उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमें ऐसी प्रणाली विकसित करनी होगी जो धरती पर जीवन को सुरक्षित और बेहतर बनाए खासकर बिजली गिरने जैसी घटनाओं से पहले लोगों को सचेत करने की तकनीक बेहद ज़रूरी है।
रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी से विकास को मिल रहा है नया आयाम
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने बताया कि अब राज्य के लगभग हर प्रमुख विभाग में रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी की भूमिका अहम होती जा रही है। उन्होंने कहा “कृषि, सिंचाई, लोक निर्माण, ग्रामीण विकास, चिकित्सा व स्वास्थ्य, वन एवं पर्यावरण, खनन, आवास, शहरी नियोजन, पंचायती राज, राजस्व, सामाजिक विकास और आपदा प्रबंधन—इन सभी क्षेत्रों में रिमोट सेंसिंग तकनीक समय की ज़रूरत बन गई है।”
मुख्य सचिव ने यह भी जोर दिया कि रियल टाइम डेटा के सहारे निर्णय लेने की प्रक्रिया अब ज्यादा सटीक और पारदर्शी हो सकती है। इससे शासन के स्तर पर योजनाओं का बेहतर कार्यान्वयन संभव होगा।
वरिष्ठ वैज्ञानिकों और अधिकारियों की भागीदारी से समृद्ध हुआ कार्यक्रम
- पंधारी यादव – सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
- आलोक कुमार – प्रमुख सचिव, नियोजन
- नवीन कुमार – अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी)
- अनुज झा – सचिव, शहरी विकास
- शीलधर सिंह यादव – निदेशक, RSAC
- डॉ. सुधाकर शुक्ला – विभागाध्यक्ष
- डॉ. जेवी थॉमस – निदेशक, EDPD-ISRO
कार्यशाला का उद्देश्य क्या था?
इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न विभागों में रिमोट सेंसिंग और GIS तकनीक के समुचित उपयोग को बढ़ावा देना था। इसके जरिए प्राकृतिक आपदाओं की समय रहते पहचान और प्रबंधन किया जा सके। कृषि उत्पादन बढ़ाने, मिट्टी व जल की गुणवत्ता जांचने में मदद मिले। शहरी विकास की योजनाओं को स्मार्ट और टिकाऊ बनाया जा सके।
स्पेस स्टेशन और मौसम पूर्वानुमान तकनीक: भारत की नई उड़ान
डॉ. वी. नारायणन की घोषणा इस दिशा में बेहद अहम मानी जा रही है कि अब भारत अपने अंतरिक्ष मिशनों में केवल अनुसंधान और सैटेलाइट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खुद का स्पेस स्टेशन बनाकर अंतरिक्ष में स्वदेशी उपस्थिति दर्ज करेगा। बिजली गिरने से हर साल हजारों जानें जाती हैं। इसरो का नया कदम इस दिशा में एक बड़ी राहत बनकर सामने आ सकता है।
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