उत्तर प्रदेश

काशी विद्वत परिषद ने जारी की नई हिंदू आचार संहिता, दहेज और फिजूलखर्ची पर सख्त रोक

Lucknow Focus News Desk: हिंदू समाज में परंपराओं को और अधिक शुद्ध व सार्थक बनाने के उद्देश्य से काशी विद्वत परिषद ने एक नई हिंदू आचार संहिता जारी की है। करीब 400 पन्नों का यह दस्तावेज देशभर के विद्वानों, शंकराचार्यों, महामंडलेश्वरों और संतों के गहन विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य सामाजिक और धार्मिक व्यवस्थाओं में व्याप्त अनावश्यक प्रथाओं पर रोक लगाते हुए जीवन को सरल, अनुशासित और धर्म सम्मत बनाना है।

फिजूलखर्ची और दिखावे पर लगेगा ब्रेक

नई आचार संहिता में दहेज प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध की सिफारिश की गई है। साथ ही शादी-विवाह जैसे आयोजनों में फिजूलखर्ची से बचने और वैदिक विधि से दिन में विवाह सम्पन्न करने की सलाह दी गई है। प्री-वेडिंग शूट और सगाई जैसी आधुनिक परंपराओं को भी हतोत्साहित करने की बात इस संहिता में प्रमुखता से कही गई है।

अंतिम संस्कार के बाद भोज में केवल 13 लोग

संहिता के अनुसार, अंतिम संस्कार के बाद होने वाले भोज (तेरहवीं आदि) में अधिकतम 13 लोगों की ही सहभागिता होनी चाहिए। इससे अनावश्यक खर्च, सामाजिक दबाव और दिखावे जैसी समस्याओं पर अंकुश लगेगा।

घर वापसी होगी सरल, मिलेगा गोत्र और नाम सहित सम्मान

धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों की हिंदू धर्म में वापसी की प्रक्रिया को भी इस संहिता में सरल और स्पष्ट किया गया है। ऐसे व्यक्ति अपना मूल गोत्र और नाम सहित फिर से हिंदू धर्म में वापस आ सकेंगे, बशर्ते उन्होंने किसी दबाव में धर्म बदला हो।

मंदिरों के गर्भगृह (अंतर्गत भाग) की पवित्रता बनाए रखने के लिए इसमें यह निर्देश दिया गया है कि गर्भगृह में केवल पुजारियों और संतों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। यह निर्णय धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा और मंदिरों की गरिमा बनाए रखने के लिए अहम माना जा रहा है।

11 टीमों ने मिलकर रचा दस्तावेज, 40 से अधिक बैठकें हुईं

काशी विद्वत परिषद के महासचिव राम नारायण द्विवेदी के अनुसार, इस आचार संहिता को तैयार करने में देश के 70 विद्वानों ने भाग लिया। इन्हें 11 टीमों और 3 उप-टीमों में बांटा गया था, जिनमें उत्तर और दक्षिण भारत के विद्वानों को समान प्रतिनिधित्व मिला। संहिता को अंतिम रूप देने के लिए 40 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं।

इस दस्तावेज को तैयार करने में मनुस्मृति, पराशर स्मृति, देवल स्मृति, साथ ही रामायण, महाभारत, श्रीमद्भगवद्गीता और पुराणों के सटीक अंशों को शामिल किया गया है। इन आधारों पर तैयार संहिता को अक्टूबर 2025 में शंकराचार्यों, रामानुजाचार्यों और अन्य प्रमुख संतों की स्वीकृति के बाद आधिकारिक रूप से लागू किया जाएगा।

5 लाख प्रतियां पूरे देश में होंगी वितरित

राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि इस संहिता की 5 लाख प्रतियां पूरे देश में वितरित की जाएंगी, ताकि समाज के सभी वर्गों तक इसका संदेश पहुंचे और हिंदू जीवनशैली को पुनः सुसंस्कृत और आत्मिक बनाया जा सके।

Also Read: बाराबंकी में अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद और लोकमान्य तिलक को काव्यांजलि, कवियों की देशभक्ति से गूंजा सुरजा सदन

Related Articles

Back to top button