उत्तर प्रदेश

UP से फाइलेरिया के खात्मे का फाइनल राउंड! 13 जून से 27 जिलों में शुरू होगा ‘नाइट ब्लड सर्वे’, रात 10 बजे के बाद घर आएगी टीम

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश से फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए योगी सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सूबे में फाइलेरिया उन्मूलन अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। आगामी 13 जून, 2026 से प्रदेश के 27 जनपदों में एक बेहद महत्वपूर्ण ‘नाइट ब्लड सर्वे’ (NBS) शुरू होने जा रहा है। यह सर्वे ही तय करेगा कि अगले साल फरवरी (2027) में राज्य के कितने जिलों में फाइलेरिया रोधी सर्वजन दवा सेवन (MDA – Mass Drug Administration) अभियान चलाया जाएगा।

बुधवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित एक उच्च स्तरीय वर्चुअल समीक्षा बैठक में राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ. ए.के. चौधरी ने सभी संबंधित जिलों के जिला मलेरिया अधिकारियों (DMOs) और स्वास्थ्य स्टाफ को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने दोटूक कहा कि इस बार के नाइट ब्लड सर्वे को सभी टीमें बेहद गंभीरता से लें, इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

रात 10 बजे के बाद ही क्यों लिए जाएंगे ब्लड सैंपल?

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, फाइलेरिया को फैलाने वाले ‘माइक्रो फाइलेरिया’ परजीवी (Parasites) इंसानी शरीर में मुख्य रूप से रात के समय, विशेषकर रात 10 बजे के बाद ही परिधीय रक्त परिसंचरण (Peripheral Blood Circulation) यानी त्वचा के करीब की रक्त वाहिकाओं में सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं। यही कारण है कि इस बीमारी के सटीक संक्रमण का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य टीमें रात 10 बजे के बाद लोगों के घरों में जाकर खून के नमूने (Blood Samples) एकत्रित करेंगी।

संक्रमण दर तय करेगी आगे की रणनीति: समझें 1% का फॉर्मूला

राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ. चौधरी ने बताया कि इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित ब्लॉक (प्लानिंग यूनिट) में फाइलेरिया का प्रभाव कितना है और पिछले एमडीए (दवा सेवन) अभियान से क्या सुधार हुआ है। इसके लिए एक कड़ा मानक तय किया गया है:

1% से कम संक्रमण: जिस ब्लॉक या प्लानिंग यूनिट के चयनित गांवों में संक्रमण (Microfilaria Rate) 1 प्रतिशत से कम पाया जाएगा, उस ब्लॉक को ‘प्री ट्रांसमिशन एसेसमेंट सर्वे’ (TAS) में भेजा जाएगा, यानी वहां आगे दवा अभियान की जरूरत नहीं होगी।

1% से अधिक संक्रमण: यदि किसी ब्लॉक में संक्रमण की दर 1 प्रतिशत से ज्यादा मिलती है, तो उस पूरे ब्लॉक को अगले साल फरवरी में होने वाले एमडीए (MDA) अभियान में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा।

सर्वे की गाइडलाइंस: केवल 20 साल से ऊपर वालों की होगी जांच

इस बार के नाइट ब्लड सर्वे के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कड़े दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए हैं।

चयनित केंद्र: इन 27 जनपदों के प्रत्येक ब्लॉक में एक सेंटिनल (स्थाई) और दो रेंडम (औचक) गांव चुने जाएंगे।

300 नमूने प्रति गांव: प्रत्येक चयनित स्थान से कुल 300 लोगों के ब्लड सैंपल लिए जाएंगे।

उम्र सीमा व नियम: यह सैंपल केवल 20 साल से अधिक उम्र के स्थानीय निवासियों का ही लिया जाएगा। गांवों में मेहमानी (रिश्तेदारी) में आए हुए बाहरी लोगों का सैंपल इस सर्वे में शामिल नहीं किया जाएगा।

मुफ्त इलाज: जांच में जो भी व्यक्ति पॉजिटिव पाया जाएगा, उसे तुरंत सूचित कर स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुफ्त फाइलेरिया रोधी दवाएं (आइवरमेक्टिन और डीईसी) खिलाई जाएंगी।

डॉ. चौधरी ने निर्देश दिया कि स्वास्थ्य टीमें गांवों में जाने से पहले संबंधित खण्ड विकास अधिकारी (BDO) और ग्राम प्रधान के साथ बैठक करें। लोगों को जागरूक करने और भीड़ एकत्रित करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) और पंचायतीराज विभाग का भी सक्रिय सहयोग लिया जाए।

उत्तर प्रदेश के इन 27 जनपदों में शुरू हो रहा है महा-सर्वे

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार, निम्नलिखित जिलों के चुनिंदा गांवों में 13 जून से टीमें रात में दस्तक देंगी।

औरेया, बहराइच, बलरामपुर, बस्ती, चंदौली, देवरिया, इटावा, फर्रुखाबाद, फतेहपुर, गाजीपुर, गोण्डा, गोरखपुर, हरदोई, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कौशांबी, लखीमपुर खीरी, कुशीनगर, महराजगंज, मिर्जापुर, रायबरेली, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, श्रावस्ती और सुल्तानपुर।

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