Lucknow News: कला, संवेदना और समर्पण के प्रतीक थे वाश चित्रकार राजीव मिश्र, प्रथम पुण्यतिथि पर लगी कृतियों की भव्य प्रदर्शनी

Lucknow Focus News Desk: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सांस्कृतिक गलियारे में सोमवार का दिन वाश पेंटिंग (Wash Painting) के प्रख्यात हस्ताक्षर स्वर्गीय राजीव मिश्र की यादों के नाम रहा। उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी एवं राजीव नीलम आर्ट्स एंड कल्चर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में वरिष्ठ वाश चित्रकार राजीव मिश्रा की प्रथम पुण्यस्मृति के अवसर पर उनकी अद्भुत कलाकृतियों की एक भव्य प्रदर्शनी और उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित परिचर्चा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का गरिमामयी शुभारंभ मुख्य अतिथियों और प्रख्यात कला मनीषियों— उमेश सक्सेना, कौशल किशोर, सीताराम कश्यप एवं भूपेंद्र कुमार अस्थाना द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और कला प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुआ। इस दौरान लगी कला प्रदर्शनी में राजीव जी की कालजयी कृतियों को देख उपस्थित कलाप्रेमी मंत्रमुग्ध नजर आए।
प्रदेश की कला परंपरा के मजबूत हस्ताक्षर थे राजीव मिश्र
प्रदर्शनी के बाद आयोजित परिचर्चा एवं संवाद सत्र में वक्ताओं ने राजीव मिश्र के कला-सृजन और उनके जीवन के विविध आयामों पर गहराई से प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि उमेश सक्सेना और सीताराम कश्यप ने राजीव मिश्र के कला-जगत में दिए गए महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने राजीव जी के साथ बिताए क्षणों और अनेक संस्मरणों को भावुक मन से साझा करते हुए कहा “राजीव मिश्र जी की कला-साधना, उनका कला के प्रति समर्पण और उनकी अनूठी सृजनात्मक दृष्टि उन्हें उत्तर प्रदेश की कला परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अमिट हस्ताक्षर बनाती है। उनका जाना कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।”
कला धरोहर के दस्तावेजीकरण (Documentation) की सख्त आवश्यकता
कार्यक्रम में पहुंचे सुप्रसिद्ध कलाकार व कला समीक्षक भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने उत्तर प्रदेश के कलाकारों और उनकी कलाधरोहर के व्यवस्थित दस्तावेजीकरण (Documentation) की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि कला-सृजन जितना महत्वपूर्ण है, भविष्य की पीढ़ी के लिए उसका संरक्षण और अभिलेखीकरण (Archiving) भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है।
भूपेंद्र अस्थाना ने मंच से राजीव मिश्र की कलाकृतियों, उनके द्वारा प्रयुक्त विशिष्ट वाश तकनीकों, विभिन्न माध्यमों तथा उनकी विविध विषय-वस्तुओं का एक बेहतरीन समीक्षात्मक विश्लेषण भी प्रस्तुत किया।
वहीं दूसरी ओर, प्रख्यात साहित्यकार कौशल किशोर ने राजीव मिश्र के कलात्मक अवदान के साथ-साथ उनके सामाजिक सरोकारों और मानवीय दृष्टिकोण को कई प्रसंगों के माध्यम से सामने रखा। उन्होंने कहा कि एक सच्चा कलाकार केवल कैनवास पर रंग नहीं भरता, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी भी होता है। राजीव जी का जीवन इस विचार का उत्कृष्ट उदाहरण था।
शॉर्ट फिल्म ने किया भावुक, बेटी स्तुति मिश्र ने जताया आभार
इस भावपूर्ण कार्यक्रम के दौरान स्वर्गीय राजीव मिश्र के कृतित्व और व्यक्तित्व पर आधारित एक लघु फिल्म (Short Film) का भी प्रदर्शन किया गया। इस फिल्म ने उनके कलात्मक सफर, कला के लिए किए गए संघर्षों, उनकी संवेदनाओं और विशिष्ट उपलब्धियों को अत्यंत मार्मिक ढंग से दर्शकों के सामने रखा, जिससे पंडाल में मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
कार्यक्रम के समापन पर स्वर्गीय राजीव मिश्र की सुपुत्री स्तुति मिश्र ने भावुक स्वर में वहां पहुंचे सभी अतिथियों, वरिष्ठ कलाकारों, कलाप्रेमियों एवं कला छात्रों के प्रति अपनी कृतज्ञता और आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने फाउंडेशन की ओर से भविष्य में आयोजित होने वाली कला-संबंधी प्रस्तावित कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी साझा की। कार्यक्रम का अत्यंत सफल संचालन साहब बख्श द्वारा किया गया।
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