उत्तर प्रदेश

लोग गाय का दूध पीकर सड़क पर छोड़ देते हैं, फसल नुकसान होने पर दोष मुझे देते हैं: सीएम योगी

कानपुर में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026’ में मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों और FPOs को किया सम्मानित

कानपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर में आयोजित ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला-2026’ को संबोधित करते हुए गो-संरक्षण और प्राकृतिक कृषि को लेकर बड़ा बयान दिया है। सीएम योगी ने बेसहारा गोवंश की समस्या पर दोटूक कहा कि कुछ लोग गाय का दूध पीने के बाद उन्हें सड़कों पर लावारिस छोड़ देते हैं, और जब वही गाय फसलों को नुकसान पहुंचाती है तो सारा दोष मुझे (सरकार को) दिया जाता है।

मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में दोहराया कि भारत में जन्मा हर व्यक्ति गोमाता को अपने परिवार का हिस्सा मानता है। हमारा यह दृढ़ संकल्प है कि प्रदेश में गोमाता को कटने नहीं देंगे और देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होने देंगे। सिख गुरुओं के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब देश गुलाम था, तब भी सिख वीर गोहत्या करने वाले आक्रांताओं और कसाइयों का वहीं काम तमाम कर देते थे।

केमिकल फर्टिलाइजर ने देश को बीमारी और कर्ज में धकेला

सीएम योगी ने कहा कि 2014 से पहले लागत अधिक और मुनाफा कम होने के कारण देश का अन्नदाता आत्महत्या करने को मजबूर था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को लागत का डेढ़ गुना मूल्य (MSP) देने की गारंटी दी। आज सॉइल हेल्थ कार्ड, फसल बीमा और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से किसानों को संबल मिला है।

रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहाआज से 30 साल पहले लोग हैंडपंप और तालाब का पानी पीकर भी स्वस्थ रहते थे। आज फर्टिलाइजर और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण हर मोहल्ले में किडनी, लिवर सिरोसिस, बीपी और डायबिटीज के मरीज मिल रहे हैं। यह जहर मुक्त खेती की ओर लौटने का समय है।”

प्राकृतिक खेती से 12 हजार रुपये प्रति एकड़ की सीधी बचत

मुख्यमंत्री ने किसानों को गो-आधारित प्राकृतिक खेती के आर्थिक लाभ समझाते हुए कहा कि बाजार से महंगे यूरिया और पेस्टीसाइड खरीदने की जरूरत नहीं है। गाय के गोबर, मूत्र, गुड़ और पानी को मिलाकर घर पर ही ‘जीवामृत’ तैयार किया जा सकता है। इससे किसानों की प्रति एकड़ 10 से 12 हजार रुपये की सीधी बचत होगी और फसल भी स्वास्थ्यवर्धक होगी।

यूपी में प्राकृतिक खेती और गो-संरक्षण के बड़े आंकड़े

  • 34 जिलों में मुहिम: गंगा किनारे के 27 जिलों और बुंदेलखंड के 7 जिलों में प्राकृतिक खेती को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • 14 लाख गोवंश संरक्षित: प्रदेश की 7,700 से अधिक गोशालाओं में 14 लाख से ज्यादा गोवंश की देखभाल सरकार कर रही है।
  • मुख्यमंत्री सहभागिता योजना: योजना के तहत गोवंश पालने वाले किसानों को 1,500 रुपये प्रतिमाह प्रति गोवंश (4 गोवंश पर 6,000 रुपये) की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसका लाभ करीब 1.5 लाख किसान उठा रहे हैं।

पराली जलाने के बजाय बायोगैस और एथेनॉल बनाएं किसान

सीएम योगी ने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने के बजाय उसे कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और एथेनॉल उत्पादन के लिए देकर अपनी आय बढ़ाएं। वैश्विक ऊर्जा संकट के दौर में भी भारत पीएम मोदी के नेतृत्व में मजबूती से खड़ा रहा और देश में महंगाई पूरी तरह नियंत्रित रही। वहीं, विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सिर्फ आलोचना करना और चिल्लाना है, वे चिल्लाते रहेंगे और भारत आगे बढ़ता रहेगा।

इस अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, खादी-ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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