OPS विकल्प विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से 6 हफ्ते में मांगा जवाब, फार्मासिस्टों ने शासनादेश को दी चुनौती

Lucknow Focus News Desk: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) का विकल्प देने संबंधी राज्य सरकार के शासनादेश (28 जून 2024) को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार से छह सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकल पीठ ने एलोपैथिक फार्मासिस्टों की ओर से दाखिल याचिका पर यह आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता की मुख्य दलील
याचिका के माध्यम से दो मुख्य बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई है। याचियों के अधिवक्ता जगदीश सिंह बुंदेला ने दलील दी कि 1998 के विज्ञापन के तहत फार्मासिस्टों की भर्ती स्वास्थ्य विभाग की गलती के कारण समय पर नहीं हो सकी। विभाग ने नियमों को दरकिनार कर जूनियर उम्मीदवारों को नियुक्त कर दिया जो आज OPS का लाभ पा रहे हैं।
वहीं, वरिष्ठ अभ्यर्थी, जिनकी नियुक्ति 2007 के विज्ञापन के बाद 2012 में हुई, वे NPS के दायरे में आ गए। याचियों ने शासनादेश के प्रस्तर दो पर आपत्ति जताई, जिसके तहत उन कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा जिनका विज्ञापन तो 28 मार्च 2005 (NPS अधिसूचना से पूर्व) को निकला, लेकिन नियुक्ति 1 अप्रैल 2005 या उसके बाद हुई।
याचियों का आरोप है कि यदि विभाग फार्मासिस्ट सर्विस रूल्स 1980 के अंतर्गत बैचवाइज और ईयरवाइज मेरिट लिस्ट बनाता, तो वे 1998 की भर्ती में ही चयनित हो जाते और पुरानी पेंशन के दायरे में आ जाते। उन्होंने राज्य सरकार पर हाईकोर्ट के विभिन्न आदेशों की अनदेखी कर शासनादेश जारी करने का भी आरोप लगाया। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार को 6 सप्ताह में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।




